अहिल्या चेंबर की अगुवाई में 125 व्यापारी संघों का प्रदर्शन; राजवाड़ा और सराफा में ढके गए QR कोड

UPI पर प्रस्तावित MDR शुल्क के विरोध में इंदौर में 'नो यूपीआई डे'! 125 व्यापारी संगठनों ने QR कोड ढककर किया प्रदर्शन। जानें व्यापारियों और निवेशकों की चिंता।

Sep 23, 2026 - 10:32
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अहिल्या चेंबर की अगुवाई में 125 व्यापारी संघों का प्रदर्शन; राजवाड़ा और सराफा में ढके गए QR कोड

इंदौर। अगले महीने से यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन पर लागू हो रहे प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के विरोध में मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के व्यापारी सबसे आगे आ गए हैं। 'नो यूपीआई डे' (No UPI Day) मनाकर इंदौर के व्यापारी बुधवार को प्रस्तावित शुल्क का कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन के मुख्य केंद्र राजवाड़ा, सियागंज, मारोठिया और सराफा बाजार जैसे ऐतिहासिक व पारंपरिक बाजार हैं। इंदौर देश का पहला ऐसा शहर बन गया है जहाँ के व्यापारी यूपीआई के नए शुल्कों के खिलाफ इतनी एकजुटता के साथ सीधे सड़कों पर उतरे हैं। इससे पहले मंगलवार शाम को टाइल्स व सेनेटरी व्यापारी एसोसिएशन ने शहर में भव्य मशाल रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया था।

📊 डिजिटल ट्रांजेक्शन में प्रदेश में नंबर-1 है इंदौर: देश में 21वें स्थान पर मौजूदगी

यदि यूपीआई लेन-देन के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस मामले में इंदौर मध्य प्रदेश में पहले स्थान पर और पूरे देश में 21वें नंबर पर आता है।

अगस्त महीने के ट्रांजेक्शन के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल प्रदेश में दूसरे (देश में 37वें), ग्वालियर तीसरे (111वें) और उज्जैन चौथे (129वें) स्थान पर है। इंदौर में बड़े पैमाने पर डिजिटल पेमेंट का उपयोग होता है, यही वजह है कि एमडीआर शुल्क का सबसे ज्यादा प्रभाव इसी शहर के व्यापार चक्र पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

🪧 अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स की अगुवाई: 125 व्यापारी संगठन एक साथ मैदान में

एमडीआर शुल्क के विरोध का औपचारिक ऐलान 'अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' ने किया है।

शहर के लगभग 125 प्रमुख व्यापारी संगठन इस चेंबर के सदस्य हैं, जो एक साथ इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। राजवाड़ा और सराफा जैसे बाजारों के अलावा पेट्रोल-डीजल पंप, प्लायवुड, लोहा बाजार, कपड़ा बाजार और सेनेटरी व्यापारियों के यहां 'नो यूपीआई डे' का व्यापक असर देखा जा रहा है। 'रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन' के सदस्यों ने राजवाड़ा पर दुकानों के यूपीआई बारकोड (QR Code) को एकत्र कर उन पर काले कपड़े बांधकर अनोखा प्रदर्शन किया।

💬 'बोझ अंततः खरीदार पर ही आएगा': अहिल्या चेंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल का तर्क

केंद्र सरकार और पेमेंट एजेंसियों का दावा है कि यूपीआई शुल्क का भार केवल व्यापारियों पर पड़ेगा और आम उपभोक्ता इससे प्रभावित नहीं होंगे।

व्यापारी और वित्तीय विशेषज्ञ इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। अहिल्या चेंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल का कहना है कि जब व्यापारी पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ पड़ेगा तो वह उसे अपनी लागत में ही जोड़ेगा, जिसका अंतिम भार खरीदार की जेब पर ही पड़ेगा। रिटेल व्यापारी जब थोक व्यापारी से माल खरीदेगा और यूपीआई से भुगतान करेगा तो उस पर लगा शुल्क भी उत्पाद की कीमत बढ़ाएगा।

📈 निवेशकों और स्टॉक ब्रोकर्स की बढ़ी चिंता: 5 लाख के ट्रांसफर पर भी अतिरिक्त लागत

कर सलाहकार आर.एस. गोयल के अनुसार, एमडीआर शुल्क से केवल आम बाजार और उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि निवेशक और स्टॉक ब्रोकर्स भी प्रभावित होंगे।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई निवेशक अपने ब्रोकर को 5 लाख रुपये ट्रांसफर करता है और उसमें से केवल 1 लाख रुपये ही शेयर बाजार में निवेश होते हैं, तो सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार 30 दिनों के भीतर शेष 4 लाख रुपये ब्रोकर को वापस लौटाने होते हैं। ब्रोकर भले ही इस प्रक्रिया में कोई आय न अर्जित करे, लेकिन उस पर पूरे 5 लाख रुपये के एमडीआर का वित्तीय बोझ आ जाएगा, जिससे निवेश की लागत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होगी।

🛒 किराना और ईएमआई भुगतान पर सबसे ज्यादा असर: आंकड़ों से समझें गणित

नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले कुल यूपीआई ट्रांजेक्शन में से करीब 25.8% किराना (ग्रॉसरी) और सुपर मार्केट में होते हैं।

दूसरे नंबर पर 18.2% लेन-देन रेस्तरां के बिल चुकाने में होते हैं। वहीं, वैल्यू (रकम) के लिहाज से लोन और ईएमआई (EMI) चुकाने में यूपीआई की हिस्सेदारी 8.3% है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोन की किश्तें आमतौर पर 2,000 रुपये से अधिक होती हैं, जिससे किश्तें और ईएमआई भरने वाले आम नागरिकों पर इस नए नियम की सबसे सीधी और भारी मार पड़ने वाली है।

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