"टिकट काटने वाला कोई और है..." दतिया पहुंचे पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने विरोधियों को ललकारा
दतिया में टिकट कटने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पुलिस प्रशासन को खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि वे दोस्ती और दुश्मनी दोनों याद रखते हैं।
दतिया। दतिया विधानसभा क्षेत्र से टिकट कट जाने के बाद चले लंबे सियासी दंगल के बीच पहली बार पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से सीधा संवाद करने पहुंचे. जनसभा को संबोधित करते हुए नरोत्तम मिश्रा ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे 'कट-टू-कट' बात की, ठीक उसी बेबाक अंदाज में जिसके लिए वे मध्य प्रदेश की राजनीति में जाने जाते हैं. अपने समर्थकों की खातिर उन्होंने सीधे तौर पर पुलिस महकमे को अपने निशाने पर लिया. उन्होंने मंच से कहा कि माइक से रिकॉर्डिंग हो रही है, इसलिए पुलिस वाले और खास तौर पर एसपी साहब मेरी बात को ध्यान से सुन लें, क्योंकि मैं आसानी से भूलने वाला प्राणी नहीं हूं.
🚓 2. "एसपी साहब ध्यान से सुनें, मैं भूलने वाला प्राणी नहीं हूं": पुलिस प्रशासन पर जमकर बरसे पूर्व गृह मंत्री
दतिया पहुंचे डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने कार्यकर्ताओं पर की गई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर प्रशासन को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कुछ दिनों पूर्व कार्यकर्ताओं पर छोड़े गए आंसू गैस के गोलों का जिक्र करते हुए पुलिस अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी.
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मंच से कहा: "मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि मैंने साढ़े 5 मिनट का वह वीडियो फुटेज देखा है. आपको चक्काजाम खुलवाना था, तो आप खुलवाते; लेकिन आंसू गैस के गोले हमारे कार्यालय की बिल्डिंग पर क्यों दागे गए? क्या हमारा कार्यालय सड़क पर रखा था? एसपी साहब सुन लें, मैं भूलने वाला प्राणी नहीं हूं. मैं दोस्ती और दुश्मनी दोनों को बहुत अच्छे से याद रखता हूं. हमारे निर्दोष कार्यकर्ताओं पर झूठे केस लादना और उन्हें पीटना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हम सभी लोग इस मामले में 3 अगस्त तक का इंतजार कर रहे हैं."
🎯 3. "टिकट काटने वाला कोई और है...": पूरे टिकट एपिसोड पर नरोत्तम मिश्रा ने बेबाकी से रखा अपना पक्ष
इस जनसभा के जरिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा असल में टिकट कटने से नाराज और आक्रोशित अपने समर्थकों को शांत करने और उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, "जब मैं तुम्हारे मन की बात समझ रहा हूं, तो तुम भी मेरे मन को समझने की कोशिश करो. आपकी पीड़ा देखकर मुझे सच में बहुत दुख होता है. उस दिन जब मुझे कुछ घायल कार्यकर्ता मिले और उन्होंने अपनी चोटें दिखाईं—किसी के सिर पर बम का गोला लगा था तो किसी के सिर के बाल जल गए थे, यह सब देखकर मेरा मन बिफर गया था और मंच पर मेरे आंसू आ गए थे. लेकिन आप लोगों ने उस बात की दिशा और दशा ही बदल दी."
नरोत्तम मिश्रा ने आगे कहा, "आप लोग कह रहे हो कि दादा के आंसुओं का बदला हम भाजपा से लेंगे. अरे! बदला तो कांग्रेस और पुलिस प्रशासन से लेना है, फिर भाजपा से क्यों? आप लोग यह भी कह रहे हो कि हम आशुतोष से बदला लेंगे. आशुतोष की इतनी क्षमता कहां है कि वह मेरा टिकट कटवा सके? टिकट काटने वाला कोई और है, जहां तक तुम्हारी सोच भी नहीं पहुंच सकती. वहां हम खुद बात करेंगे, तुम तो जानते ही हो कि हम आसानी से ठहरने वाले नहीं हैं."
❤️ 4. "इस प्यार के सामने विधायकी की क्या औकात?": कार्यकर्ताओं के प्रति उमड़ा पूर्व गृह मंत्री का अपनापन
नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ताओं के प्रति गहरा अपनापन और स्नेह जताते हुए कहा कि आप सब मेरे दिल के सबसे नजदीक हो और संकट के इस समय में आप लोगों ने यह साबित भी कर दिया है. जनता और कार्यकर्ताओं से मिलने वाले इस अपार प्रेम से बड़ी भला और क्या उपलब्धि हो सकती है? इसके आगे विधायकी की कोई बिसात नहीं है. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक (MLA) हैं, लेकिन आज भी सबसे ज्यादा चर्चा सिर्फ नरोत्तम मिश्रा की ही हो रही है. दतिया की जनता से मेरा दिल का रिश्ता है. यह राजनीति तो खो-खो के खेल जैसी है, जहां लोग पीछे से 'खो' देने के लिए हमेशा तैयार बैठे रहते हैं.
💪 5. "मरते दम तक दतिया के साथ रहूंगा": कार्यकर्ताओं से की आशुतोष के लिए पूरी ताकत लगाने की अपील
समर्थकों को ढाढस बंधाते हुए नरोत्तम मिश्रा ने कहा, "मैं दतिया छोड़कर कहीं लंदन या ब्रिटेन नहीं चला गया हूं. मैं तो मरते दम तक आप सभी के सुख-दुख में साथ रहने वाला हूं. पिछले ढाई साल जब मेरे पास विधायकी नहीं थी, तब भी मैंने आपकी सेवा में कोई कमी नहीं आने दी. आधी रात को भी याद कर लेना यार, अगर आपके लिए जान नहीं लगा दी तो कहना. बशर्ते दतिया में भाजपा मजबूत रहनी चाहिए. एक बात हमेशा जेहन में उतारकर रखो कि जो आप बोलते हो, वही जनता वापस लौटा कर देती है. इसलिए मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ रहा हूं कि अपनी पूरी ताकत भाजपा प्रत्याशी आशुतोष के लिए लगाओ."
भाषण के अंत में नरोत्तम मिश्रा ने बुंदेलखंडी की एक पारंपरिक कहावत का उदाहरण देते हुए कहा, "मोगरी कतई दूबर (कमजोर) हो जाए, पर बैंगन कूटने लायक तो बनी ही रहती है यार!" इसका सीधा सा राजनीतिक मतलब यह था कि भले ही वे इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं या वर्तमान में किसी पद पर नहीं हैं, लेकिन दतिया की राजनीति में उनका प्रभाव और ताकत आज भी उतनी ही मजबूत है.
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