अब बिना खून निकाले सिर्फ फूंक मारने से पता चलेगा ब्लड शुगर! MP के प्रोफेसर ने बनाई अनोखी डिवाइस
बिना सुई चुभाए केवल फूंक से जांचें ब्लड शुगर! बालाघाट के डॉक्टर और छात्रों ने बनाई 'Sugar Breath 4.0' डिवाइस, जिसका पेटेंट भी हो चुका है। जानें पूरी तकनीक।
भोपाल। शरीर में ब्लड शुगर का स्तर जांचने के लिए अब उंगली में सुई चुभोकर खून का सैंपल लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सिर्फ एक फूंक मारते ही शुगर का सटीक स्तर पता चल सकेगा। यह क्रांतिकारी बदलाव जल्द ही हकीकत बनने जा रहा है। मध्य प्रदेश के बालाघाट स्थित 'पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' के प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे ने अपने तीन होनहार छात्रों के साथ मिलकर इस अनूठी डिवाइस को तैयार किया है। इस तकनीक का भारतीय पेटेंट भी प्राप्त कर लिया गया है और वर्तमान में इसे और अधिक एडवांस बनाने पर काम जारी है।
📜 सुश्रुत संहिता के आयुर्वेद सिद्धांत पर आधारित है तकनीक: मुंह की सांस और एसीटोन गंध से होगी जांच
प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे के अनुसार, बिना खून निकाले शुगर जांचने का यह विचार प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथ 'सुश्रुत संहिता' के निदानस्थान से लिया गया है।
जब शरीर में डायबिटीज (मधुमेह) का स्तर सामान्य से बहुत कम या ज्यादा होता है, तो शरीर ऊर्जा के लिए फैट बर्न करना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में शरीर में एसीटोन (Acetone) की मात्रा बढ़ती है, जो सांस के जरिए मुंह से बाहर आती है। इसी वैज्ञानिक व आयुर्वेदिक सिद्धांत को आधार बनाकर उन्होंने 'शुगर ब्रीथ 4.0' (Sugar Breath 4.0) डिवाइस तैयार की है। इसमें सिर्फ डिवाइस में फूंक मारनी होती है और स्क्रीन पर तुरंत रिपोर्ट दिख जाती है।
🏥 आईसीयू मरीजों और ऑक्सीजन मास्क के लिए भी उपयोगी: पेटेंट के बाद अब नंबर्स रेंज पर चल रही रिसर्च
इस डिवाइस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे आईसीयू (ICU) में भर्ती गंभीर मरीजों के ऑक्सीजन मास्क से जोड़कर भी रियल-टाइम में शुगर लेवल ट्रैक किया जा सकता है।
फिलहाल यह डिवाइस स्क्रीन पर तीन बेसिक इंडिकेटर—लो (कम), नॉर्मल (सामान्य) और हाई (ज्यादा) दर्शाती है। डॉक्टर अगासे और उनकी टीम अब इसे सटीक संख्यात्मक रेंज (नंबर्स) में बदलने के लिए रिसर्च कर रही है। काम पूरा होते ही इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारा जाएगा। इस प्रोजेक्ट में उनके साथ छात्र हर्ष तिवारी, पल्लवी ऐदे और मुस्कान वैद्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
🩺 'सटीक रेंज का पता लगाना चुनौतीपूर्ण': एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स ने जताई थोड़ी हिचकिचाहट
दूसरी ओर, भोपाल के वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. सचिन चित्तावर का कहना है कि जब तक डिवाइस की क्लिनिकल केस स्टडी और विस्तृत आंकड़े सामने नहीं आ जाते, तब तक केवल सांस से सटीक रीडिंग निकालना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने बताया कि मधुमेह के इलाज में यह जानना बेहद आवश्यक होता है कि मरीज प्री-डायबिटिक है या उसकी शुगर किस रेंज में है, क्योंकि उसी आधार पर दवाएं तय की जाती हैं। बहरहाल, यदि यह तकनीक सटीक आंकड़े देने में सफल होती है, तो यह चिकित्सा जगत में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
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