भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग का घेराव करेगी कांग्रेस; जीतू पटवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की उठाई मांग
मध्य प्रदेश में मतदाता सूची विवाद पर कांग्रेस का हल्ला बोल! भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग का घेराव और 6 सूत्रीय मांगों को लेकर जीतू पटवारी का बड़ा ऐलान। पढ़ें रिपोर्ट।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस सोमवार को राज्य निर्वाचन आयोग की इकाई का विशाल घेराव करने जा रही है। इसके अगले चरण में मंगलवार से पूरे प्रदेश भर में जिला कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन कर घेराव किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) जीतू पटवारी ने भोपाल मुख्यालय में पत्रकार वार्ता आयोजित कर ऐलान किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता, उनकी गिरफ्तारी नहीं होती या फिर उन पर महाभियोग नहीं चलाया जाता, तब तक कांग्रेस का यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा। पटवारी ने बताया कि आगामी तीन दिनों में दिल्ली में 'कांग्रेस कार्यसमिति' (CWC) की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
📢 'पारदर्शी तरीके से मिले हर सवाल का जवाब': हजारों कार्यकर्ताओं के साथ मैदान में उतरेगी कांग्रेस
भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि "कांग्रेस की मुख्य मांग है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से उठे सभी गंभीर सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब सार्वजनिक किया जाए। जहाँ किसी भी अधिकारी या तंत्र की संदिग्ध भूमिका सामने आती है, वहाँ निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच की व्यवस्था बनाई जाए।"
उन्होंने आगे बताया कि इस राष्ट्रव्यापी मुद्दे पर केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों में भी एसआईआर (SIR) व वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक दलों और जागरूक नागरिकों द्वारा सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस इन सभी विषयों को नागरिकों के मूलभूत लोकतांत्रिक अधिकारों के संदर्भ में मजबूती से उठाएगी।
📜 कांग्रेस की 6 सूत्रीय मांगें: चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट निष्पक्षता को लेकर आर-पार की लड़ाई
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट किया कि पार्टी की मुख्य रूप से 6 सूत्रीय मांगें हैं, जिन्हें लेकर पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा:
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल पद से इस्तीफा लिया जाए।
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चुनाव प्रक्रिया एवं मतदाता सूची में हुई अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
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यदि जांच में कोई आपराधिक कृत्य या धोखाधड़ी प्रमाणित होती है, तो संबंधितों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
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दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व व्यक्तियों के विरुद्ध कड़े कानून के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई हो।
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मतदाता सूची से हटाए गए प्रत्येक वास्तविक नागरिक को अपना पक्ष रखने और नाम पुनः जुड़वाने का न्यायसंगत अवसर मिले।
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संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, तकनीक-सुरक्षित और निष्पक्ष बनाया जाए।
🗳️ '34.25 लाख से अधिक नाम हटाए गए': एमपी की ड्राफ्ट व फाइनल वोटर लिस्ट के आंकड़ों पर उठाए सवाल
जीतू पटवारी ने मतदाता सूची के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर (SIR) के प्रारंभिक चरण में मध्य प्रदेश की वोटर लिस्ट से अभूतपूर्व संख्या में नाम हटाए जाने की बात उजागर हुई थी।
दिसंबर 2025 में प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रक्रिया में 42,74,160 नामों से संबंधित आवश्यक जानकारी या फॉर्म उपलब्ध न होने की बात कही गई थी। इसके बाद दावे-आपत्तियों और भौतिक सत्यापन का दौर चला। फरवरी 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 5,39,81,065 मतदाता दर्ज किए गए और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 34,25,078 नाम विलोपित (हटाए) कर दिए गए, जबकि ड्राफ्ट सूची की तुलना में लगभग 8.49 लाख मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि दर्ज हुई।
🔍 'विधानसभा और बूथवार विवरण सार्वजनिक करे प्रशासन': जनता को कारण जानने का अधिकार
कांग्रेस अध्यक्ष ने सीधे तौर पर सवाल खड़ा किया कि ड्राफ्ट सूची और अंतिम मतदाता सूची के बीच हुए इतने बड़े पैमाने पर फेरबदल का विधानसभा क्षेत्रवार और मतदान केंद्र (बूथवार) पूरा ब्योरा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में देश के प्रत्येक नागरिक और मतदाता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसका नाम सूची में बरकरार है या नहीं। और यदि किसी वैध नागरिक का नाम सूची से हटाया गया है, तो उसका स्पष्ट और वैधानिक कारण क्या है, इसका जवाब चुनाव आयोग को देना ही होगा।
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