15 हजार से बढ़कर 25 हजार हुई पीएफ लिमिट; आपकी Take Home Salary पर क्या होगा असर?

सरकार ने EPFO के तहत PF लिमिट 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी है। कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सीटीसी (CTC) के नाम पर कर्मचारियों की 'टेक होम सैलरी' न घटाई जाए।

Sep 26, 2026 - 16:51
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15 हजार से बढ़कर 25 हजार हुई पीएफ लिमिट; आपकी Take Home Salary पर क्या होगा असर?

केंद्र सरकार (श्रम एवं रोजगार मंत्रालय) ने देश की सभी कंपनियों और नियोक्ताओं (Employers) को एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह किए जाने के बाद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी नए नियम का हवाला देकर कर्मचारियों की 'टेक-होम सैलरी' में कटौती नहीं कर सकती। इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य यह है कि पीएफ दायरे के विस्तार का वास्तविक लाभ कर्मचारियों को मिले और उनके मासिक बजट पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

🏢 कंपनियों को सरकार का सख्त निर्देश: सीटीसी (CTC) के नाम पर न हो कटौती

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने नियोक्ताओं को निर्देश दिया है कि EPFO ​​के तहत 25,000 रुपए की बढ़ी हुई सैलरी लिमिट लागू होने के बाद कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी बिल्कुल भी कम नहीं होनी चाहिए। इस कदम का मकसद उन आशंकाओं को दूर करना है कि बढ़ी हुई सैलरी लिमिट के तहत नियोक्ता का हिस्सा कर्मचारियों की ‘कॉस्ट-टू-कंपनी’ (CTC) से एडजस्ट किया जा सकता है। सरकार ने 17 सितंबर को EPFO ​​के तहत वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए कर दिया था, ताकि 1 करोड़ से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज के दायरे में लाया जा सके। मंत्रालय ने सुझाव दिया कि कंपनियां सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन में अपने हिस्से को बेहतर ह्यूमन रिसोर्स प्रैक्टिस और कर्मचारियों की संतुष्टि के तौर पर देखें।

💰 पीएम रोजगार योजना (PMVBRY) से होगी कंपनियों की कॉस्ट की भरपाई

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नियोक्ता के कानूनी योगदान को सिर्फ ‘कॉस्ट-टू-कंपनी’ (CTC) का हिस्सा बताकर कर्मचारी की सैलरी से कटौती के तौर पर नहीं देखा जा सकता। जारी किए गए FAQs में मंत्रालय ने माना कि इससे नियोक्ताओं की कॉस्ट में अनुमानित बढ़ोतरी होगी। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी कहा कि नियोक्ता ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ (PMVBRY) के तहत हर अतिरिक्त रोजगार के लिए 3,000 रुपए प्रति माह तक के प्रोत्साहन से इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ की कुछ हद तक भरपाई कर सकते हैं। साथ ही, वर्कफोर्स को औपचारिक बनाने से निवेश के ठिकाने के तौर पर भारत की छवि भी बेहतर होती है।

⏳ तत्काल लागू करना होगा नियम, ईपीएस (EPS) में भी जाएगा हिस्सा

मंत्रालय ने नियोक्ताओं को प्रभावित कर्मचारियों की समीक्षा तुरंत शुरू करने और अगले पेरोल साइकिल का इंतजार न करने का सख्त निर्देश दिया है। मंत्रालय ने कहा, “तत्काल प्राथमिकता पहचानना, हिसाब लगाना, एनरोल करना, रिपोर्ट करना और रकम जमा करना होनी चाहिए।" इसमें यह भी साफ किया गया कि 15,000 रुपए से ज्यादा और 25,000 रुपए से कम सैलरी वाले सभी योग्य कर्मचारियों के लिए ‘एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम’ (EPS) का मेंबर बनना ज़रूरी होगा। कर्मचारी का जरूरी 12 फीसदी योगदान पूरी तरह से EPF में जाएगा, जबकि नियोक्ता का 12 फीसदी योगदान दो हिस्सों में बंटेगा। इसका 8.33 फीसदी हिस्सा EPS (पेंशन) में जाएगा और बाकी का हिस्सा EPF (भविष्य निधि) में जमा होगा।

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