30 करोड़ की सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया, दुकानों से अवैध वसूली की जांच शुरू

शिवपुरी में मेडिकल कॉलेज की 15 बीघा सरकारी जमीन पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर 37 अवैध दुकानें और निर्माण ध्वस्त कर दिए हैं। इस जमीन की कीमत करीब 30 करोड़ रुपए है।

Sep 29, 2026 - 17:31
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30 करोड़ की सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया, दुकानों से अवैध वसूली की जांच शुरू

मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित कीमती सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को मंगलवार को पूरी सख्ती के साथ हटा दिया गया। लगभग 15 बीघा सरकारी जमीन पर बनाए गए 36 से 37 अवैध निर्माणों और दुकानों को दो बड़े बुलडोजर की मदद से जमींदोज कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस मुक्त कराई गई बेशकीमती जमीन की बाजार में अनुमानित कीमत करीब 25 से 30 करोड़ रुपए आंकी गई है। सुरक्षा के मद्देनजर कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया।

👮‍♂️ भारी पुलिस बल और नगर पालिका अमले की मौजूदगी में हुई कार्रवाई, मलबा हटाने के लिए लगे डंपर

इस पूरी विध्वंस कार्रवाई के दौरान फिजिकल थाना, कोतवाली थाना और यातायात पुलिस के दर्जनों जवान मौके पर मुस्तैद रहे। इसके साथ ही नगर पालिका का पूरा अमला भी प्रशासन के साथ इस अभियान में शामिल रहा। अतिक्रमण हटाने के बाद मौके पर फैले मलबे, टीन-शेड और अन्य सामान को तुरंत वहां से हटाने के लिए कई डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को लगाया गया, ताकि रास्ते को जल्द से जल्द साफ किया जा सके।

📜 मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित थी जमीन, एक साल से लगातार दिए जा रहे थे नोटिस

एसडीएम आनंद सिंह राजावत ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरी जमीन मूल रूप से शासकीय मेडिकल कॉलेज के नाम पर आवंटित है। भविष्य में इस भूमि पर एक आधुनिक आश्रय स्थल (रैन बसेरा या हॉस्टल) बनाए जाने की योजना प्रस्तावित है। इस जमीन पर लंबे समय से किए जा रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर प्रशासन की तरफ से कानूनी प्रक्रिया काफी समय से चल रही थी। प्रशासन के अनुसार, अतिक्रमणकारियों को पिछले एक साल से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे थे और उन्हें स्वेच्छा से कब्जा हटाने की समझाइश भी दी गई थी, लेकिन जब उन्होंने कब्जा नहीं हटाया, तो तहसीलदार न्यायालय से विधिवत आदेश पारित किए गए।

💰 दुकानों से हर महीने की जा रही थी अवैध वसूली, किराएदारों ने की थी शिकायत

जांच के दौरान प्रशासन को यह चौंकाने वाली जानकारी भी मिली है कि सरकारी जमीन पर बनाई गई इन अवैध दुकानों को किराए पर उठाया गया था। एसडीएम के मुताबिक, इन दुकानों से हर महीने लगभग 5 से 8 हजार रुपए तक का अवैध किराया वसूले जाने की बात सामने आई है। कुछ किराएदारुं ने स्वयं प्रशासन से शिकायत की थी कि कुछ लोग उनसे जबरन किराए के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। इस प्रकार सरकारी जमीन पर कब्जा कर व्यावसायिक दुकानें चलाने और अवैध रूप से किराया वसूलने का गंभीर मामला सामने आने के बाद, प्रशासन अब इस अवैध नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी गहन जांच कर रहा है।

⚖️ दोषियों के खिलाफ आगे भी जारी रहेगी कानूनी कार्रवाई, प्रशासन कर रहा है मास्टरमाइंड की तलाश

एसडीएम आनंद सिंह राजावत ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण पूरी तरह हटाने के बाद अब इस पूरे प्रकरण में संलिप्त लोगों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि आखिर इस सरकारी जमीन पर इतनी बड़ी संख्या में दुकानें किसके संरक्षण और इशारे पर बनाई गई थीं और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं, जो गरीब किराएदारों से अवैध वसूली कर रहे थे।

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