भोपाल के छोटे तालाब में मिल रहा 8 एमएलडी सीवेज, एनजीटी की सख्ती पर नगर निगम पर 2.10 करोड़ का जुर्माना

भोपाल के छोटे तालाब में रोजाना 8 एमएलडी सीवेज मिलने के मामले में एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2.10 करोड़ की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन किया है।

Sep 30, 2026 - 14:55
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भोपाल के छोटे तालाब में मिल रहा 8 एमएलडी सीवेज, एनजीटी की सख्ती पर नगर निगम पर 2.10 करोड़ का जुर्माना

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित लोअर लेक (छोटे तालाब) में रोजाना धड़ल्ले से पहुंच रहे गंदे और बिना उपचारित सीवेज को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि झील के अंदर प्रतिदिन करीब 8 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) बिना ट्रीटमेंट का गंदा पानी मिल रहा है। इसमें अकेले बाणगंगा नाले से लगभग 6 एमएलडी और पुराने मछलीघर के पास से 2 एमएलडी सीवेज सीधे झील में गिर रहा है। इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने भोपाल नगर निगम पर 2.10 करोड़ रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (एनवायरनमेंटल कंपनसेशन) का आकलन किया है। यह पूरी सुनवाई आवेदक राशिद नूर खान की ओर से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ द्वारा की गई है।

💰 21 महीने के उल्लंघन का हिसाब, एनजीटी ने स्पष्ट की क्षतिपूर्ति और अंतिम जुर्माने की प्रक्रिया

एमपीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, झील में सीवेज के लगातार मिलने को लेकर 31 मार्च 2026 से 31 दिसंबर 2027 तक की कुल 21 महीने की अवधि का आकलन किया गया है। इसमें प्रत्येक नाले के लिए 5 लाख रुपए प्रति माह की दर से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय की गई है, जिसके आधार पर कुल राशि करीब 2.10 करोड़ रुपए बैठती है। हालांकि, एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्षतिपूर्ति की यह अंतिम राशि उल्लंघन की वास्तविक अवधि और मौके पर होने वाले भौतिक सत्यापन के आधार पर ही तय की जाएगी, यानी फिलहाल इस आकलन को अंतिम जुर्माना नहीं माना गया है।

⏳ नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण के लिए दिसंबर 2027 तक करना होगा इंतजार

नगर निगम प्रशासन की ओर से ट्रिब्यूनल को जानकारी दी गई कि लोअर लेक में समा रहे 8 एमएलडी सीवेज के स्थाई उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता के एक नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। निगम के मुताबिक, इस प्लांट का काम 11 सितंबर 2026 से आरंभ हो चुका है और इसे पूरा करने की समय-सीमा 31 दिसंबर 2027 निर्धारित की गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल झील में मिल रहे सीवेज के मुकाबले पूरी तरह से उपचार की आधुनिक व्यवस्था धरातल पर उतरने में अभी एक साल से अधिक का लंबा समय और लगेगा।

🏛️ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के प्रमुख सचिव भी बने पक्षकार, 15 दिन में मांगा गया जवाब

इस पूरे मामले में केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जिम्मेदारी भी गंभीर सवाल के घेरे में आ गई है। सीवेज ट्रीटमेंट और शहर की झीलों के रखरखाव से जुड़ी प्राथमिक जिम्मेदारियों को देखते हुए एनजीटी ने पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव को भी इस मामले में आधिकारिक तौर पर पक्षकार बना लिया है। ट्रिब्यूनल ने विभाग को नोटिस जारी कर आगामी 15 दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

🌳 पेड़ों को केमिकल से सुखाने के मामले में भी एक्शन, वन विभाग को दिए गए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

सुनवाई के दौरान केवल जल प्रदूषण ही नहीं, बल्कि प्रोफेसर कॉलोनी और सिविल लाइंस क्षेत्र में पेड़ों को कथित रूप से केमिकल डालकर सुखाने का एक अन्य संवेदनशील मामला भी अदालत के सामने आया। इसमें भू-स्वामी मो. अनीस खान पर 45 हजार रुपए की पेनल्टी लगाए जाने की बात सामने आई। एनजीटी ने वन विभाग को इस मामले में सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। लोअर लेक से जुड़े इस बहुआयामी मामले में पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले अन्य पहलुओं को भी शामिल किया गया है, और इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई आगामी 15 अक्टूबर 2026 को होगी।

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