लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की समाधि पर अनोखी परंपरा, कृष्णपुरा छत्री परिसर में हो रहा निःशुल्क सामूहिक तर्पण

इंदौर में होलकर राजघराने के समाधि स्थल कृष्णपुरा छत्री पर निःशुल्क सामूहिक तर्पण का आयोजन किया जा रहा है। यहां बिना किसी खर्च के दिवंगतों का श्राद्ध कर्म होता है।

Sep 30, 2026 - 16:00
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लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की समाधि पर अनोखी परंपरा, कृष्णपुरा छत्री परिसर में हो रहा निःशुल्क सामूहिक तर्पण

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मालवा के प्रसिद्ध होल्कर राजघराने की महान शासक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर अपनी दानशीलता, न्यायप्रियता और परोपकार के लिए इतिहास में अमर हैं। अब उनकी पावन समाधि (छत्री) परिसर में भी परोपकार और सेवा की यही पुरानी परंपरा 'सामूहिक तर्पण' के रूप में जीवंत हो रही है। इंदौर के ऐतिहासिक कृष्णपुरा छत्री परिसर में होलकर राजघराने के मुख्य समाधि स्थल पर उन तमाम दिवंगतों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए सामूहिक श्राद्ध कर्म का आयोजन किया जाता है, जिनका किन्हीं पारिवारिक या अन्य कारणों से सामान्य रूप से तर्पण या श्राद्ध कर्म संपन्न नहीं हो पाता है।

🤲 'अनंत सेवा न्यास' संस्था उठा रही है पूरा जिम्मा, गरीब व जरूरतमंद परिवारों के लिए शुरू की गई है निःशुल्क व्यवस्था

लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन आदर्शों और प्रेरणा से यहां 'अनंत सेवा न्यास' नामक सामाजिक संस्था इस पवित्र परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाते हुए निःशुल्क श्राद्ध कर्म का आयोजन करवा रही है। संस्था का मानना है कि अहिल्याबाई ने मालवा की धरती पर जो जनसेवा और परोपकार की मजबूत आधारशिला रखी थी, वह तर्पण और मानवता के इन कार्यों के माध्यम से हमेशा आगे बढ़नी चाहिए। राज परिवार के इस प्रमुख समाधि स्थल पर श्राद्ध पक्ष के दौरान हर साल सुबह 7:30 बजे से 10:00 बजे तक यह विशेष आयोजन किया जाता है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोग अपने ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों का विधि-विधान से पिंडदान कर सकें।

📜 कर्मकांड से लेकर पूजन सामग्री और वस्त्र तक सब कुछ मिलता है मुफ्त, पुरोहित करवाते हैं सामूहिक मंत्रोच्चार

इस अनोखे आयोजन के सूत्रधार पंडित अशोक चतुर्वेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि होल्कर राजघराने ने इंदौर में सरस्वती, कृष्ण और चंद्रभागा नदियों के संगम स्थल पर अपने शासकों का अंतिम संस्कार किया था, और इसी ऐतिहासिक स्थान पर यह तर्पण शिविर लगाया जाता है। यहां आने वाले हर व्यक्ति के लिए यह व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क है। आयोजन स्थल पर विभिन्न विद्वान पुरोहित तर्पण की संपूर्ण सामग्री के साथ मौजूद रहते हैं और माइक के जरिए सामूहिक मंत्रोच्चार के साथ सभी से विधि-विधान से तर्पण करवाते हैं। इसके अलावा स्नान के उपरांत पारंपरिक वस्त्र, बर्तन और पूजा से जुड़ी अन्य आवश्यक सामग्री भी अनंत सेवा न्यास द्वारा ही मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है।

🛕 महारानी अहिल्याबाई होलकर ने अपने कार्यकाल में देश भर में करवाए थे प्रमुख मंदिरों और घाटों का निर्माण

अपने जीवनकाल में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने सन 1767 से 1795 के बीच राजकोष से देश के कोने-कोने में अनगिनत मंदिरों, धर्मशालाओं, विश्राम गृहों और प्रमुख नदियों पर पक्के घाटों का निर्माण करवाया था। उनके द्वारा देश भर में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए किए गए कार्यों में उज्जैन का चिंतामन गणेश मंदिर, ओंकारेश्वर का ममलेश्वर मंदिर, नासिक व पंढरपुर के श्रीराम मंदिर, उनकी जन्मस्थली चौंडी का महादेव मंदिर, चित्रकूट, पुष्कर, ऋषिकेश, प्रयाग का विष्णु मंदिर, जेजुरी का गौतमेश्वर मंदिर, मथुरा-वृंदावन मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, गया का विष्णुपद मंदिर और एलोरा का घृष्णेश्वर मंदिर समेत कई ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।

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