मौसम बदलते ही लंपी वायरस के प्रकोप से राहत, रतवाई गोशाला में घटी संक्रमित गोवंश की संख्या
ग्वालियर में मौसम बदलते ही लंपी वायरस का प्रकोप तेजी से कम हो गया है। जिले में अब तक 60 हजार से अधिक गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही लंपी स्किन डिजीज से पीड़ित गोवंश और पशुपालकों को बड़ी राहत मिली है। मानसून की विदाई होने और वर्षा का क्रम थमने के बाद शहर में लंपी वायरस का संक्रमण तेजी से कमजोर होने लगा है। नगर निगम के मदाखलत और पशु चिकित्सा अमले द्वारा विभिन्न क्षेत्रों से रेस्क्यू किए जा रहे संक्रमित गोवंश को अब रतवाई स्थित गोशाला पहुंचाया जा रहा है, जहां राहत की बात यह है कि कभी रोजाना 5 से 10 संक्रमित मवेशी आ रहे थे, जिनकी संख्या अब घटकर मात्र 1 से 2 रह गई है।
🦟 मौसम में बदलाव से टूटा संक्रमण चक्र: जिले में 60 हजार से अधिक गोवंश का हुआ निःशुल्क टीकाकरण
पशु विशेषज्ञों के अनुसार, लंपी वायरस का प्रसार मुख्य रूप से बरसात के मौसम में मक्खी, मच्छर और किलनी जैसे कीटों के जरिए तेजी से होता है। नमी अधिक होने पर ये कीट अधिक सक्रिय रहते हैं, लेकिन धूप खिलने और वर्षा थमने से इनका असर कम हुआ है, जिससे वायरस का चक्र टूट गया है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए पूरे जिले में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया गया, जिसके तहत शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर अब तक लगभग 60 हजार से अधिक गोवंश को गोट पॉक्स (Goat Pox) वैक्सीन लगाई जा चुकी है। हालांकि, विभागीय आंकड़ों (करीब 65 मौतें) और स्थानीय पशुपालकों के दावों में मृत्यु दर को लेकर अंतर भी देखने को मिला है।
🏥 रतवाई गोशाला के आइसोलेशन वार्ड में 20 गोवंश का इलाज जारी: पशु चिकित्सकों की खास सलाह
रतवाई गोशाला में बनाए गए विशेष आइसोलेशन वार्ड में अभी भी लगभग 20 संक्रमित गोवंश को स्वस्थ पशुओं से अलग रखकर डॉक्टरों की देखरेख में एंटीबायोटिक्स और मल्टीविटामिन दिए जा रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि भले ही वायरस का प्रकोप कम हो गया हो, लेकिन सतर्कता बनाए रखें। यदि किसी पशु के शरीर पर गांठें उभरने, तेज बुखार या सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत अन्य मवेशियों से अलग कर नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें।
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