38 साल पुरानी जमीन पर न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की सुगबुगाहट पर भड़के किसान, विरोध में उठाई मांग
छिंदवाड़ा में 38 साल पहले पावर प्लांट के लिए ली गई जमीन पर अब न्यूक्लियर प्लांट लगाने की तैयारी का किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों ने जमीन वापसी की मांग की है।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ करीब 38 साल पहले सरकार द्वारा किसानों से अधिग्रहित की गई जमीन पर अब पावर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है। इस बात की भनक लगते ही इलाके के किसानों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। किसानों का आरोप है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी जब पावर प्लांट का काम शुरू नहीं हुआ और उन्हें नौकरी का वादा भी पूरा नहीं मिला, तो उनकी जमीनें बंजर हो गईं। अब किसान इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट का पुरजोर विरोध कर रहे हैं और सरकार से अपनी जमीनें वापस लौटाने की मांग कर रहे हैं।
🌾 ग्राम चौसरा में हुई प्रभावित किसानों की बड़ी बैठक: थर्मल और न्यूक्लियर दोनों परियोजनाओं के विरोध का ऐलान
ग्राम चौसरा में सोमवार को थर्मल और न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्तावित निर्माण के विरोध में किसानों की एक महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में हिवरखेड़ी, चौसरा, धनौरा, डागावानी, पिपरिया और थावड़ी सहित आसपास के दर्जनों गाँवों के प्रभावित किसान शामिल हुए। किसानों ने सामूहिक रूप से एक सुर में यह माँग उठाई कि उनके क्षेत्र में किसी भी प्रकार का पावर प्लांट या न्यूक्लियर प्रोजेक्ट स्थापित नहीं किया जाना चाहिए। किसानों का कहना है कि यह जमीन उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और वे इसके लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
📜 38 वर्षों से भूमि पर किसानों का कब्जा: कागजी अधिग्रहण और नए कानून के तहत चार गुना मुआवजे की मांग
किसानों ने स्पष्ट किया कि भले ही कागजों में जमीन का अधिग्रहण दिखाया गया हो, लेकिन पिछले लगभग 38 वर्षों से आज भी इस भूमि पर किसानों का ही भौतिक कब्जा चला आ रहा है और इससे जुड़े कई न्यायालयीन प्रकरण भी विचाराधीन हैं। किसान परशराम वर्मा और हरिराम वर्मा ने कहा कि सरकार ने नौकरी देने का वादा पूरा नहीं किया और अब न्यूक्लियर प्लांट से जहरीली हवा व पर्यावरण को नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। किसानों ने माँग की है कि या तो उन्हें जमीन वापस दी जाए, या फिर यदि सरकार नए नियमों के तहत जमीन लेती है, तो उन्हें नए भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक चार गुना मुआवजा प्रदान किया जाए। वहीं, इस मामले पर चौरई एसडीएम प्रभात मिश्रा का कहना है कि उन्हें किसानों की ओर से ज्ञापन प्राप्त हुआ है, लेकिन न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर उनके पास कोई आधिकारिक या लिखित प्रस्ताव नहीं आया है।
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