समाजशास्री सरदार खान के 45 साल के संघर्ष पर बनेगी बायोपिक फिल्म, 'फादर टेरेसा ऑफ इंडिया' के नाम से हैं मशहूर

भोपाल के समाजसेवी और शुभम विकलांग समिति के संस्थापक सरदार खान के 45 वर्षों के संघर्ष और समाजसेवा पर अब बड़े पर्दे पर बायोपिक बनाई जाएगी।

Oct 05, 2026 - 15:06
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समाजशास्री सरदार खान के 45 साल के संघर्ष पर बनेगी बायोपिक फिल्म, 'फादर टेरेसा ऑफ इंडिया' के नाम से हैं मशहूर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक प्रेरणादायक और बड़ी खबर सामने आई है। शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी और 'शुभम विकलांग एवं समाज सेवा समिति' के संस्थापक सरदार खान के करीब 45 वर्षों के लंबे सामाजिक जीवन और संघर्ष की कहानी अब जल्द ही बड़े पर्दे पर दिखाई देगी। मुंबई के त्रिशक्ति फिल्म्स के बैनर तले उनके जीवन पर आधारित एक बायोपिक फिल्म बनाने की आधिकारिक पहल की गई है। इस फिल्म में दिव्यांग, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के लिए सरदार खान द्वारा किए गए अद्वितीय सेवा कार्यों के साथ-साथ उनके जीवन के कड़े संघर्ष और सामाजिक सफर को मुख्य कहानी के रूप में दर्शाया जाएगा।

👶 310 से ज्यादा बच्चों की संवारी जिंदगी: बिना संतान के बने 'पिता', लेखक नवाब आरजू लिखेंगे फिल्म की पटकथा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरदार खान ने निःसंतान होने के बावजूद 310 से अधिक दिव्यांग और अनाथ बच्चों को अपनाकर उनकी पूरी जिंदगी संवारी है, जिसके कारण उन्हें बच्चों के बीच 'पिता' के रूप में पहचान मिली है और शहर उन्हें 'फादर टेरेसा ऑफ इंडिया' कहकर सम्मान देता है। फिल्म के निर्देशक डीएन धर्मानंद जोशी और सोशल एक्टिविस्ट एम.के. आजाद ने बताया कि त्रिशक्ति फिल्म्स द्वारा इस बायोपिक का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी पटकथा प्रसिद्ध लेखक नवाब आरजू तैयार करेंगे और निर्देशन हिरदेश के. द्वारा किया जाएगा। इस फिल्म का अनुमानित बजट करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपए रखा गया है, तथा फिल्म से होने वाली कमाई का एक हिस्सा अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए दान किया जाएगा।

🤝 गैस त्रासदी से लेकर लावारिस शवों के अंतिम संस्कार तक: 1978 से शुरू हुआ था समाजसेवा का यह सफर

सरदार खान ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उनके पिता जिया हुसैन खान ने वर्ष 1978 में उन्हें समाजसेवा के मार्ग पर चलने की सीख दी थी, जिसे उन्होंने अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बना लिया। उनके सामाजिक कार्यों में भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की सहायता, लावारिस शवों का अंतिम संस्कार, गरीबों को कपड़े व कंबल वितरण, 67 बच्चों के पल्स पोलियो ऑपरेशन में मदद, गरीब कन्याओं का विवाह, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और नियमित रूप से पक्षियों को दाना डालना शामिल है। समाजसेवियों ने कहा कि इस बायोपिक के बनने से नई पीढ़ी को मानवता और निष्काम सेवा के कार्यों के लिए एक बड़ी प्रेरणा मिलेगी।

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