खेत में गूंजी किलकारी, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोयाबीन के खेत में कराया गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव
रतलाम के जावरा में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए सोयाबीन के खेत में ही एक गर्भवती श्रमिक महिला का सुरक्षित प्रसव कराया है।
आम तौर पर सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और व्यवस्थाओं को लेकर कई खबरें सामने आती हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। यहां जावरा के लालखेड़ा गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेत के बीच पहुंचकर एक गर्भवती श्रमिक महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। खाकरा कुड़ी सैलाना से सोयाबीन काटने आई रीना बाई ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है, और जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
🚑 समय पर पहुंची मेडिकल टीम, दाई और स्टाफ ने खेत में ही संभाला मोर्चा
दरअसल, सोयाबीन कटाई के लिए परिवार के साथ आई आदिवासी श्रमिक महिला रीना बाई को अचानक खेत पर ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति की नजाकत को देखते हुए ग्रामीण कमलेश सेन ने तुरंत जावरा सिविल अस्पताल प्रभारी डॉक्टर दीपक पाड़लिया को सूचना दी। बिना देर किए अस्पताल से एंबुलेंस, दाई सुशीला शर्मा और मेडिकल स्टाफ को डिलीवरी किट के साथ मौके पर भेजा गया। टीम ने मौके पर ही सूझबूझ दिखाते हुए सुरक्षित प्रसव कराया, जिसके बाद मां और नवजात को जावरा सिविल अस्पताल के न्यू मेटरनिटी विंग में भर्ती कराया गया।
👩⚕️ सीएमएचओ ने दी जानकारी, समय पर मिलीं सभी स्वास्थ्य सेवाएं
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. किरण वाडीवा ने बताया कि प्रसूता रीना बाई (उम्र 24 वर्ष) की यह दूसरी डिलीवरी थी। सैलाना के शासकीय स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें पहले ही सभी महत्वपूर्ण जांच, टीकाकरण और दवाइयां समय पर मिल चुकी थीं, जिसके चलते 3 किलो 200 ग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ। समय पर मिली चिकित्सकीय मदद से एक बड़ा संकट टल गया, हालांकि आदिवासी अंचल के परिवारों को मजदूरी के लिए पलायन करने जैसी व्यवस्थाओं पर अभी भी मंथन करने की जरूरत है।
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