जबलपुर में 23 हजार दिव्यांग पेंशनधारियों का प्रदर्शन, ई-केवाईसी और लेट पेमेंट को लेकर प्रशासन पर उठाए सवाल
जबलपुर में दिव्यांगों ने पेंशन भुगतान में देरी और कम राशि को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया है। हितग्राहियों ने पेंशन बढ़ाने और प्रक्रिया सरल करने की मांग की है।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में दिव्यांगों को समय पर पेंशन भुगतान न होने और पेंशन की राशि बेहद कम होने जैसी विभिन्न समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या में असहाय लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र सोनी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि सरकार दिव्यांगों की मूलभूत समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। जिले में ऐसे तमाम दिव्यांग हैं, जिनकी रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतें सरकार से मिलने वाली महज 600 रुपये महीने की पेंशन पर निर्भर करती हैं, लेकिन उसमें भी लगातार देरी हो रही है।
⏳ महीनों चक्कर काटने को मजबूर हितग्राही, ई-केवाईसी बनी बड़ी बाधा
दिव्यांगों की समस्याओं को उठाते हुए देवेंद्र सोनी ने बताया कि पिछले लगभग छह महीने से पेंशन वितरण की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। कुछ लोगों के खातों में राशि पहुंच रही है, तो वहीं बहुसंख्यक दिव्यांग अभी भी पेंशन का इंतजार कर रहे हैं। पेंशन की स्थिति जानने और बैंक संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए दिव्यांगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके अलावा कई मामलों में ई-केवाईसी (e-KYC) लंबित होने के कारण भी हितग्राहियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
💰 'लाडली बहना की तरह दिव्यांग पेंशन समय पर क्यों नहीं?' - तीखे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार लाडली बहना योजना जैसी अन्य योजनाओं की राशि हर महीने एक निश्चित तारीख पर बिना किसी रुकावट के सीधे खातों में भेज सकती है, तो फिर दिव्यांगों की पेंशन में इतनी हीला-हवाली क्यों की जाती है? जबलपुर में करीब 55 हजार दिव्यांग बताए जाते हैं, लेकिन 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले लोग पात्रता के दायरे से बाहर होने के कारण केवल लगभग 23 हजार लोग ही पेंशन पा रहे हैं। सामाजिक न्याय विभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक आशीष दीक्षित ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों की ई-केवाईसी लंबित है, उनकी प्रक्रिया पूरी होते ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
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