अमेरिका में परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया रुकी, लाखों भारतीयों के ग्रीन कार्ड का इंतजार लंबा

अमेरिका ने इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल समेत 8 बड़ी कंपनियों के PERM आवेदन सस्पेंड कर दिए हैं, जिससे भारतीय कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

Oct 09, 2026 - 20:58
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अमेरिका में परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया रुकी, लाखों भारतीयों के ग्रीन कार्ड का इंतजार लंबा

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता और अधिक कठिन हो गया है। अमेरिकी सरकार ने भारतीय दिग्गज कंपनियों—इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो और HCLTech के साथ-साथ कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को ग्रीन कार्ड से जुड़ी 'PERM' (परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन) प्रक्रिया से अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। सरकार की ओर से इन कंपनियों पर वीजा और रोजगार नियमों के कथित गलत इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं। इस बड़े फैसले से अमेरिका में रह रहे विदेशी कर्मचारियों की स्थायी नागरिकता की योजना पर ग्रहण लग सकता है।

🔍 क्या है PERM प्रक्रिया और क्यों हुई यह सख्त कार्रवाई?

PERM (प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट) अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की दिशा में उठाया जाने वाला पहला और बेहद अहम कदम है। इसके तहत कंपनियों को अमेरिकी श्रम विभाग को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए कोई योग्य स्थानीय अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से स्थानीय कर्मचारियों के हितों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ रहा है। अमेरिकी श्रम विभाग ने अब इन 8 कंपनियों से जुड़े नए PERM आवेदनों और पेंडिंग मामलों पर रोक लगा दी है। सरकार का आरोप है कि इन कंपनियों द्वारा नियमों के पालन में खामियों के चलते स्थानीय अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों और वेतन पर असर पड़ा है।

⏳ 10 लाख से अधिक भारतीय ग्रीन कार्ड के इंतजार में, बढ़ सकती है मुश्किलें

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 10 लाख भारतीय पेशेवर रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं, जिनमें दिसंबर 2025 तक पेंडिंग मामलों में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 79% थी। PERM प्रक्रिया रुकने के कारण अब भारतीय कर्मचारियों को अपने H-1B वीजा नवीनीकरण और ग्रीन कार्ड के बैकलॉग के कारण लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, टीसीएस ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि पिछले दो वर्षों में उनके PERM आवेदन बहुत कम रहे हैं और वे अमेरिकी नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं, जिससे उनकी भर्ती प्रक्रिया पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

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