कटनी के कैमोर में एस्बेस्टस के जहरीले कचरे से बड़ा संकट, 15 हजार लोगों पर मंडरा रहा खतरा
कटनी के कैमोर क्षेत्र में एस्बेस्टस के 10 लाख टन जहरीले कचरे से हजारों लोगों पर संकट मंडरा रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्वतंत्र प्रदूषण सर्वे की मांग की है।
भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के बाद अब मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आज़ादी से पहले 1934 में स्थापित और 1988 तक संचालित रही एक पुरानी फैक्ट्री का कचरा गंभीर संकट बन गया है। कटनी के कैमोर-कलहरा क्षेत्र में लगभग 10 लाख टन एस्बेस्टस वेस्ट बिखरा होने की बात सामने आ रही है, जिससे करीब 10 से 15 हजार लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कटनी पहुंचकर प्रभावित इलाकों का दौरा किया और प्रदूषण से पीड़ित लोगों से मुलाकात की।
🔍 2016 की रिपोर्ट के बाद भी 10 साल तक कार्रवाई क्यों नहीं?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कैमोर में डंप किए गए जहरीले कचरे और फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि साल 2016 में कनाडा की पर्यावरण संस्था ECOH Management Inc. की वैज्ञानिक रिपोर्ट में कैमोर में बड़े पैमाने पर सतही प्रदूषण और 10 लाख टन दूषित सामग्री की पुष्टि हो चुकी थी। सिंघार ने सवाल उठाया कि जब रिपोर्ट छह साल पहले आ चुकी थी, तो सरकार ने पिछले 10 वर्षों में इस पर क्या कदम उठाए? उन्होंने क्षेत्र में स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रदूषण सर्वेक्षण कराने, घर-घर मेडिकल जांच और प्रभावितों के लिए मुआवजे की रणनीति बनाने की पुरजोर मांग की है।
⏳ एस्बेस्टस संकट की पूरी टाइमलाइन और खतरे की वजह
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1934: कटनी के कैमोर क्षेत्र में एस्बेस्टस-सीमेंट निर्माण उद्योग की शुरुआत हुई।
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प्राकृतिक खनिज: एस्बेस्टस एक रेशेदार खनिज है, जिसके बारीक रेशे सांस के जरिए शरीर में जाने पर फेफड़ों की गंभीर बीमारियों और कैंसर का कारण बनते हैं।
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2016 स्टडी: ECOH Management की रिपोर्ट में कैमोर और कलहरा में लगभग 10 लाख टन एस्बेस्टस दूषित मिट्टी और कचरे का अनुमान लगाया गया।
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ताजा आंकड़े (2025-2026): हालिया जांच रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्र में 5,000 से अधिक लोगों में एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों के लक्षण और उपचार की आवश्यकता सामने आई है।
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