सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या पर विदिशा के बेतवा घाट पर उमड़ी भीड़, श्रद्धालुओं ने किया तर्पण और पिंडदान
सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या के पावन अवसर पर विदिशा के बेतवा तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी है। नदी में स्नान कर पितरों का तर्पण किया जा रहा है।
सर्वपितृ अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या के दुर्लभ और पवित्र संयोग पर आज सुबह से ही विदिशा के बेत्रवती (बेतवा) नदी तट और नवग्रह मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला पूरी आस्था के साथ जारी है। सूर्योदय के साथ ही दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों और शहर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नदी घाटों पर पहुंचने लगे। पवित्र बेतवा नदी के ठंडे जल में डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों और पितरों की आत्मा की शांति के लिए जल, तिल और कुशा के साथ विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान किया।
⏳ सुबह 3 बजे से शुरू हुआ विशेष मुहूर्त, दान-पुण्य का भी रहा विशेष महत्व
पंचांग के अनुसार, आज सुबह 3 बजे से शुरू हुआ यह विशेष मुहूर्त शाम 6 बजे तक लगातार जारी रहेगा, जिसके तहत सुबह से ही स्नान और तर्पण का मुख्य कार्य चल रहा है। इसके साथ ही शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग होने के कारण अन्नदान और वस्त्रदान का भी विशेष महत्व माना गया है। घाटों पर मौजूद जरूरतमंदों को सुबह से ही श्रद्धालुओं द्वारा भोजन और अन्य उपयोगी सामग्री का दान किया जा रहा है। बेतवा घाट के पुजारी पंडित राजेंद्र दुबे ने बताया कि कलियुग में बेतवा नदी को मां गंगा के समान ही पवित्र और मोक्षदायिनी माना गया है, जहां पितरों के निमित्त किया गया तर्पण अत्यंत फलदायी होता है।
🌿 भूतड़ी अमावस्या पर नर्मदा घाटों पर भी विशेष अनुष्ठान, नवरात्रि का हुआ शुभारंभ
दूसरी ओर, पितृ मोक्ष अमावस्या (जिसे भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है) के अवसर पर मां नर्मदा के सेठानी घाट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। 16 दिन के श्राद्ध पक्ष का समापन करते हुए लोगों ने अपने पूर्वजों को याद किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। घाट पर मौजूद पुजारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि आज के दिन पितृ अपने परिजनों को वंश वृद्धि और समृद्धि का आशीर्वाद देकर अपने लोक को प्रस्थान करते हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के अस्त्र-शस्त्रों का पूजन कर शारदीय नवरात्रि पर्व का विधिवत शुभारंभ किया।
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