बांधवगढ़ की प्रसिद्ध बाघिन 'डॉटी' की मौत, मां के बिना जंगल में भटक रहे दो शावक
उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध बाघिन 'डॉटी' की मौत हो गई है। मानपुर बफर में शव मिलने के बाद वन विभाग उसके 15 माह के शावकों पर नजर रख रहा है।
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों को मायूस कर देने वाली खबर सामने आई है। बांधवगढ़ की चर्चित और पहचान बन चुकी बाघिन 'डॉटी' अब इस दुनिया में नहीं रही। मानपुर बफर रेंज की मझखेता बीट में हाथियों के माध्यम से गश्त के दौरान वन विभाग की टीम को बाघिन का शव मिला, जिससे अधिकारियों में हलचल मच गई। इस घटना का सबसे संवेदनशील और चिंताजनक पहलू डॉटी के वे दो छोटे शावक हैं, जो मां का साया सिर से उठने के बाद अब जंगल में अकेले विचरण कर रहे हैं।
🐘 हाथियों से गश्त के दौरान मिला शव, एनटीसीए (NTCA) की गाइडलाइन के तहत हुआ पोस्टमार्टम
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि 9 अक्टूबर को गश्त के दौरान अधिकारियों को एक मादा बाघ का शव दिखाई दिया। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत पूरे घटनास्थल को सील किया गया। शाम को डॉग स्क्वाड की मदद से आसपास के पूरे इलाके की सघन तलाशी ली गई, जिसमें कोई भी संदिग्ध वस्तु या इंसानी हलचल नहीं पाई गई। 10 अक्टूबर को पशु चिकित्सा अधिकारियों के दल ने अधिकारियों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम संपन्न कराया और बिसरा सैंपल लैब जांच के लिए भेजे गए हैं।
🐾 प्राथमिक जांच में प्राकृतिक मौत का अंदेशा, दोनों शावकों की सुरक्षा पर टिकीं नजरें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक दृष्टि से बाघिन डॉटी की मौत का कारण प्राकृतिक पाया गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद समिति के समक्ष शव दहन कर दिया गया। अब वन प्रबंधन का पूरा ध्यान डॉटी के दोनों 15 से 16 माह के शावकों पर है। मां से अलग होने के बाद दोनों शावक जंगल में अकेले विचरण कर रहे हैं। वन विभाग हाथियों और कैमरों की मदद से उनकी हर गतिविधि पर 24 घंटे लगातार निगरानी रख रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षा और भोजन को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
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