एमपी के राजकीय पशु बारहसिंगा की संख्या बढ़कर हुई 1,400, कान्हा और सतपुड़ा में सफल हुआ पुनर्वास अभियान
मध्य प्रदेश के राजकीय पशु बारहसिंगा की संख्या बढ़कर 1,400 हो गई है। कान्हा और सतपुड़ा में चलाए गए पुनर्वास अभियान से इनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
मध्य प्रदेश के राजकीय पशु 'बारहसिंगा' के संरक्षण की दिशा में वन विभाग को एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। राज्य में बारहसिंगा की कुल संख्या अब बढ़कर 1,400 तक पहुंच गई है। एक समय था जब बारहसिंगा छत्तीसगढ़ के रायपुर, जगदलपुर से लेकर गुजरात के अहमदाबाद और महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले तक बहुतायत में पाए जाते थे, लेकिन समय के साथ इनके प्राकृतिक आवास सिमटते चले गए। वर्ष 1964 में स्थिति यह हो गई थी कि कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में केवल 66 हार्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा ही शेष बचे थे, जो अब बढ़कर लगभग 1,000 हो चुके हैं।
🌲 सतपुड़ा और बांधवगढ़ में पुनर्वास अभियान रहा कामयाब: बोरी अभयारण्य में 115 बारहसिंगा किए गए थे शिफ्ट
कान्हा टाइगर रिजर्व में किसी आपदा या महामारी के कारण बारहसिंगा की इस दुर्लभ प्रजाति के विलुप्त होने के खतरे को टालने के लिए सतपुड़ा क्षेत्र को इनके अनुकूल मानकर वहां बसाने का बड़ा निर्णय लिया गया था। सबसे पहले भोपाल के वन विहार में कान्हा से बारहसिंगा लाकर बसाए गए। वहां मिली सफलता के बाद वर्ष 2015 में सतपुड़ा के बोरी अभयारण्य में विशेष एन्क्लोजर बनाकर इनकी शिफ्टिंग शुरू की गई। वर्ष 2015 से 2023 के बीच कुल 115 बारहसिंगा यहां शिफ्ट किए गए थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 300 के आसपास पहुंच गई है।
🌿 मध्य प्रदेश में पाई जाती हैं बारहसिंगा की दो मुख्य प्रजातियां: जानिए इनकी खास विशेषताएं
विशेषज्ञों के अनुसार, बारहसिंगा मुख्य रूप से दो प्रजातियों के होते हैं। इनमें 'हार्ड ग्राउंड' (Hard Ground) प्रजाति कान्हा राष्ट्रीय उद्यान जैसे सूखे घास के मैदानों और ठोस जमीनों पर रहना पसंद करती है, हालांकि यह कुछ समय के लिए पानी में भी जाती है। वहीं दूसरी 'वेटलैंड' बारहसिंगा प्रजाति मुख्य रूप से दलदली और नम इलाकों में ही पाई जाती है। मध्य प्रदेश में इन दोनों प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के चलते आज इनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।
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