दिल्ली आंदोलन में शामिल होने से पहले कांग्रेस नेता नजरबंद, पुलिस ने रोधी दिल्ली कूच की तैयारी

दिल्ली में चल रहे आंदोलन में शामिल होने जा रहे मुरैना और भिंड के कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रात में ही होटलों में नजरबंद कर दिया है।

Oct 12, 2026 - 15:49
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दिल्ली आंदोलन में शामिल होने से पहले कांग्रेस नेता नजरबंद, पुलिस ने रोधी दिल्ली कूच की तैयारी

राजधानी दिल्ली में चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना होने से ठीक पहले मुरैना और भिंड के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात जिला कांग्रेस कार्यालय पर पहुंची पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए दिल्ली कूच की तैयारी कर रहे कांग्रेसियों को हिरासत में ले लिया। सोमवार सुबह जब कार्यकर्ताओं ने बाहर निकलने का प्रयास किया, तो पुलिस ने उन्हें रोककर शहर के अलग-अलग होटलों में नजरबंद कर दिया। इस कार्रवाई से स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है।

🚗 गाड़ियां कोतवाली थाने में जब्त: ग्रामीण जिलाध्यक्ष मधुराज तोमर और शहर अध्यक्ष गजेंद्र जाटव हिरासत में

जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आह्वान पर दिल्ली में आयोजित आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए मुरैना और भिंड के कांग्रेसी जिला कार्यालय पर जुटे थे। भिंड शहर कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र उर्फ पिंकी भदौरिया भी अपने दर्जनों समर्थकों के साथ मुरैना पहुँचे थे। यहाँ जैसे ही दिल्ली जाने की रणनीति पर बैठक समाप्त हुई, कोतवाली पुलिस मौके पर आ धमकी। पुलिस ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को वाहनों में बैठाकर पहले पुलिस लाइन पहुँचाया और फिर शहर के विभिन्न होटलों में नजरबंद कर दिया। इसके साथ ही, कांग्रेस नेताओं की गाड़ियां भी जब्त कर कोतवाली थाने में खड़ी करवा दी गईं।

🗣️ 'जनता की आवाज दबाना चाहती है सरकार': कांग्रेस कार्यकर्ताओं में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी

इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस खेमे में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष मधुराज तोमर ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे तानाशाही करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुँचने से रोककर आम जनता की वास्तविक आवाज को कुचलना चाहती है। तोमर ने दोटूक कहा कि कांग्रेस अब केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसे इस तरह की दमनकारी नीतियों से दबाया नहीं जा सकता।

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