देवी अहिल्याबाई के ऐतिहासिक किले की मरम्मत योजना में शामिल, प्रशासन लेगा जायजा
खरगोन के महेश्वर किले की ऐतिहासिक दीवारों में दरारें आने पर समाजसेवी जितेंद्र नेगी ने कलेक्टर और खासगी ट्रस्ट को पत्र लिखकर संरक्षण की मांग की है।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी महेश्वर की पहचान माने जाने वाले प्रसिद्ध किले की प्राचीन दीवारों में जगह-जगह गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। किले की जर्जर होती स्थिति पर चिंता जताते हुए समाजसेवी व एडवोकेट जितेंद्र नेगी ने इसके त्वरित संरक्षण और मरम्मत की मांग उठाई है। उन्होंने 'महेश्वर संरक्षण संवर्धन-दर्शन पर्यटन संस्थान' के माध्यम से जिले के कलेक्टर और खासगी चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष व प्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर किले की दीवारों को सहेजने का आग्रह किया है।
🌳 जनआस्था का केंद्र है किला: पेड़ों की जड़ों और दरारों का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग
नेगी ने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि यह ऐतिहासिक किला महज पत्थर और चूने से बना निर्माण नहीं, बल्कि निमाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अपार जनआस्था का केंद्र है। दीवारों में उभरी दरारें और उनके आसपास उगे पेड़ इसके तुरंत रखरखाव की आवश्यकता की ओर ध्यान खींचते हैं। परिसर में पहले से ही जोखिम क्षेत्र का चेतावनी बोर्ड लगा हुआ है। ऐसे में समय रहते विशेषज्ञों की देखरेख में पुरातात्विक और पारंपरिक स्थापत्य शैली को ध्यान में रखते हुए कमजोर हिस्सों का तकनीकी आकलन और मरम्मत कार्य कराया जाना बेहद आवश्यक है।
📜 प्रशासन व खासगी ट्रस्ट का रुख: जल्द होगा निरीक्षण, योजनाबद्ध तरीके से होगी मरम्मत
मामले में संज्ञान लेते हुए एसडीएम पूर्वा मंडलोई ने बताया कि शीघ्र ही राजस्व और तकनीकी टीम द्वारा किले की दीवारों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा, जिसके बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई होगी। वहीं, खासगी ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंतराव होलकर ने बताया कि विश्व स्मारक निधि और खासगी ट्रस्ट द्वारा महेश्वर की ऐतिहासिक छत्रियों का जीर्णोद्धार कार्य जारी है। आगामी चरण में किले की दीवारों में आई दरारों की मरम्मत को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
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