कलेक्टर का कड़ा आदेश, बीजेपी पार्षद रेणु कोरी और बेटे को एक महीने में खाली करना होगा बुजुर्गों का मकान
जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने भरण-पोषण अधिनियम के तहत आदेश जारी कर बीजेपी पार्षद रेणु कोरी और एक अन्य व्यक्ति को एक महीने में मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने दो अलग-अलग मामलों में बेहद कड़े और महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। पहले मामले में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया वार्ड की भाजपा पार्षद रेणु कोरी को एक महीने के भीतर मकान खाली करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। वहीं, दूसरे मामले में सुनील रामचंदानी को भी अपने पिता की स्वअर्जित संपत्ति को खाली करने का आदेश दिया गया है। जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तय समयसीमा में आदेश का पालन न होने पर प्रशासनिक बल का प्रयोग कर कब्जा हटाया जाएगा।
👵 87 वर्षीय ससुर रूपलाल कोरी ने लगाई थी गुहार: बहु पर लगाया था जबरन कब्जा करने का आरोप
पहला मामला त्रिमूर्ति नगर निवासी 87 वर्षीय रूपलाल कोरी से जुड़ा है, जिन्होंने कलेक्टर के समक्ष अपील दायर की थी। बुजुर्ग रूपलाल का आरोप था कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से 2400 वर्गफीट का प्लॉट खरीदा था, जिस पर दुकान भी बनी हुई है। उनके दिवंगत बेटे की पत्नी और स्थानीय भाजपा पार्षद रेणु कोरी इस संपत्ति पर कब्जा जमाए बैठी हैं और खाली नहीं कर रही हैं। एसडीएम कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान पार्षद रेणु कोरी ने तर्क दिया था कि मकान के नवीनीकरण (रिनोवेशन) में उनके पति का पैसा लगा है। हालांकि, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया कि संपत्ति ससुर रूपलाल द्वारा अर्जित की गई है, इसलिए पुत्रवधू इस पर अपना अधिकार नहीं जता सकती और उन्हें एक महीने में मकान खाली करना होगा।
👴 बेलबाग के बुजुर्ग पिता को भी मिला न्याय: बेटे द्वारा संपत्ति कब्जाने के मामले में प्रशासन सख्त
दूसरा मामला 70 वर्षीय बसंत रामचंदानी से जुड़ा है, जिन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी कि बेलबाग में उनके बेटे सुनील रामचंदानी ने उनके मकान और दुकान पर अवैध कब्जा कर लिया है और उनकी देखभाल भी नहीं कर रहा है। कलेक्टर ने इस मामले में स्पष्ट किया कि यह संपत्ति बसंत रामचंदानी ने अपनी मेहनत की कमाई से बनाई है, इसलिए बेटे सुनील का इस पर कोई कानूनी हक नहीं बनता है। कलेक्टर ने सुनील को भी एक महीने के भीतर संपत्ति खाली करने के निर्देश दिए हैं।
📜 माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रमुख प्रावधान
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शिकायत का अधिकार (धारा 5): वरिष्ठ नागरिक अपने भरण-पोषण के लिए सीधे ट्रिब्यूनल में आवेदन कर सकते हैं।
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मासिक सहायता (धारा 9): ट्रिब्यूनल बच्चों या जिम्मेदार रिश्तेदारों को बुजुर्गों को आर्थिक सहायता देने का आदेश दे सकता है।
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संपत्ति की सुरक्षा (धारा 22): बुजुर्गों के जीवन और उनकी संपत्ति की रक्षा के लिए प्रशासनिक व्यवस्था का कड़ा प्रावधान है।
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संपत्ति हस्तांतरण रद्द कराना (धारा 23): देखभाल की शर्त पर दी गई संपत्ति, यदि शर्त पूरी न हो तो उसे कानूनी रूप से रद्द कराया जा सकता है।
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बेसहारा छोड़ने पर सजा (धारा 24): बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ने वाले जिम्मेदार व्यक्ति को 3 महीने तक की कैद, ₹5,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
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