मालवीर के गोसाई टांडा में नवरात्रि पर अनोखी परंपरा, 9 दिन के लिए मंदिर से बाहर विराजित होती हैं मां चालकी देवी
बुरहानपुर के मालवीर टांडा में मां चालकी देवी के मंदिर से जुड़ी अनोखी परंपरा है। यहां नवरात्रि में 9 दिनों के लिए मूर्ति का स्थान परिवर्तन किया जाता है।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में शहरी से लेकर ग्रामीण अंचलों तक शारदीय नवरात्रि की धूम मची हुई है। इसी बीच जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मालवीर के गोसाई टांडा से एक बेहद अनूठी और आस्था से जुड़ी खबर सामने आई है। यहां गोसाई समाज की कुल देवी मां चालकी माता का करीब 30 वर्ष पुराना सिद्ध मंदिर स्थित है, जहाँ पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के तहत नवरात्रि के पावन अवसर पर मां की मूर्ति को मंदिर से निकालकर एक मकान में अस्थाई रूप से विराजित किया जाता है। इस स्थान पर मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र सहित दूर-दूर से भक्त दर्शन और मन्नत मांगने पहुंचते हैं।
🐍 सांप का जहर उतारने और गंभीर बीमारियों से मुक्ति का दावा: सिद्ध स्थान पर उमड़ता है भक्तों का सैलाब
मान्यता और किवदंतियों के अनुसार, पुजारी सुखराम के परिवार को वर्षों पहले माताजी ने सपने में दर्शन दिए थे, जिसके बाद इस मंदिर की स्थापना की गई थी। पुजारियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि इस मंदिर में माता के आशीर्वाद से सर्पदंश (सांप के काटने) का जहर निशुल्क और पूरी तरह से उतर जाता है। इसके अलावा शारीरिक कष्टों व जटिल बीमारियों से निजात पाने के लिए लोग यहां मन्नत मांगते हैं। इस बार इंदौर, सनावद, खंडवा और गुजरात के विभिन्न जिलों से कई परिवार बिस्तर और राशन-सामग्री लेकर पहुंचे हैं, जो पूरे नौ दिनों तक मंदिर परिसर में टेंट लगाकर रुकते हैं और स्वस्थ होकर लौटते हैं।
🗑️ भक्तों की भारी भीड़ के बीच फैली गंदगी: ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर लगाए लापरवाही के आरोप
एक तरफ जहां इस धार्मिक स्थल पर अगाध आस्था और श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ मालवीर टांडा में साफ-सफाई व्यवस्था के बुरे हाल हैं। मंदिर के आसपास और जगह-जगह कचरे का अंबार लगा होने से फैली बदबू के कारण श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सरपंच भूरसिंह और सचिव राजू ठाकरे पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सरपंच भूरसिंह ने सफाई व्यवस्था की बात कहते हुए आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन व्यवस्थाओं की कमी दूरदराज से आने वाले भक्तों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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