मध्य प्रदेश में 8 साल बाद ओबीसी आरक्षण पर फैसला, सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में कानूनी विशेषज्ञों से की चर्चा
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में कानूनी सलाह ली, तो नेता प्रतिपक्ष ने विशेष सत्र की मांग की।
मध्य प्रदेश में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण को लेकर करीब आठ साल के लंबे इंतजार के बाद आए न्यायिक फैसले के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर आगे की कानूनी रणनीति तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली पहुंचकर भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में उच्च न्यायालय के निर्णय से जुड़े प्रत्येक विधिक पहलू और आगामी वैधानिक विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की गई।
🏛️ बीजेपी का बयान- पिछड़े वर्ग को हक दिलाने के लिए हर वैधानिक विकल्प पर जारी है काम
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णय के बाद सभी कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है ताकि संवैधानिक प्रावधानों के तहत पिछड़े वर्ग के हितों की रक्षा की जा सके और उन्हें उनका पूरा अधिकार दिलाया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार इस दिशा में पूरी तत्परता के साथ प्रभावी कदम उठा रही है।
📢 नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने की विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग: सरकार पर साधा निशाना
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल से चर्चा कर रहे हैं, जबकि सरकार के पास विधानसभा का विकल्प सीधे तौर पर मौजूद है। सर्वदलीय बैठक पहले ही हो चुकी है, इसलिए यदि सरकार की नीयत साफ है, तो उसे तुरंत विशेष सत्र बुलाकर ओबीसी आरक्षण की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करना चाहिए।
📊 हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला: फिलहाल प्रदेश में 14 प्रतिशत आरक्षण ही रहेगा लागू
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछले आठ वर्षों से संशय और इंतजार की स्थिति बनी हुई थी। हाल ही में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विवेक सराफ की खंडपीठ ने अपने स्पष्ट फैसले में कहा है कि राज्य में ऐसी कोई असाधारण स्थिति नहीं है जिसके आधार पर ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया जाए। अदालत के इस निर्णय के बाद वर्तमान में मध्य प्रदेश में 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण ही प्रभावी रूप से लागू है।
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