इंदौर में कम बारिश के चलते गहराया जल संकट, गरबा पंडालों में पानी बचाने और भजन गाने की दिलाई जा रही शपथ
इंदौर में कम बारिश से उत्पन्न जल संकट को देखते हुए गरबा पंडालों में पानी बचाने, भजन गाने और लव जिहाद के खिलाफ सुरक्षा की शपथ दिलाई जा रही है।
अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के आर्थिक राजधानी इंदौर में जल संकट के संकेत मिलने लगे हैं। शहर में इस वर्ष औसत (35 इंच) के मुकाबले महज 23 इंच बारिश ही दर्ज की गई है, जिसके चलते भूजल स्तर और जलस्रोतों में पानी की कमी होने लगी है। इस स्थिति से निपटने और नागरिकों को जागरूक करने के लिए अब उत्सवों का सहारा लिया जा रहा है। शहर के गरबा पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं और आयोजकों को पानी की एक-एक बूंद बचाने का संकल्प दिलाया जा रहा है, ताकि आने वाले दिनों में विकट जल संकट से निपटा जा सके।
🎶 फिल्मी गानों की जगह गूंजेंगे सिर्फ भजन: विधानसभा एक में हुई महत्वपूर्ण बैठक
जल संकट और सांस्कृतिक शुचिता को ध्यान में रखते हुए विधानसभा एक में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने इस दौरान कहा कि इस साल पिछले वर्षों की तुलना में आधी बारिश हुई है, इसलिए पानी की हर एक बूंद सहेजना बेहद जरूरी हो गया है। साथ ही यह निर्देश भी दिए गए हैं कि गरबा आयोजनों में फूहड़ और फिल्मी गानों के स्थान पर केवल देवी-देवताओं की वंदना करने वाले पारंपरिक और भक्तिमय भजन ही बजाए जाएं।
🛡️ सुरक्षा और संस्कारों का अनूठा संगम: गरबा पंडालों के लिए तय किए गए तीन मुख्य संकल्प
शहर के लगभग 500 गरबा पंडालों के आयोजकों और स्थानीय समितियों को सुरक्षा और संरक्षण के मोर्चे पर तीन अहम संकल्प दिलाए गए हैं:
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भक्तिमय माहौल: दुर्गा मां की प्रतिमा के सामने केवल पारंपरिक और भक्तिमय भजनों पर ही गरबा का आयोजन होगा।
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जल संरक्षण: पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए सभी लोग पूरी तरह संकल्पित रहेंगे।
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सुरक्षा कवच: गरबा परिसरों में बालिकाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कड़े इंतजाम किए जाएंगे और भयमुक्त माहौल सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हर वार्ड में इसके लिए विशेष प्रभारियों की नियुक्ति भी कर दी है।
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