मध्य प्रदेश के पुराने शिक्षकों की पदोन्नति और TET अनिवार्यता पर हाईकोर्ट का अहम आदेश, मोहन सरकार लेगी फैसला
जबलपुर हाईकोर्ट ने वर्ष 2001 से पूर्व नियुक्त मध्य प्रदेश के शिक्षाकर्मियों को प्रमोशन में TET से छूट देने संबंधी याचिका पर सरकार को 60 दिनों में फैसला लेने का आदेश दिया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने राज्य के हजारों पुराने शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक सिंह की एकलपीठ ने वर्ष 2001 से पूर्व नियुक्त शिक्षाकर्मियों को पदोन्नति प्रक्रिया में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से छूट प्रदान करने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों द्वारा पूर्व में पारित आदेशों का हवाला देते हुए राज्य की मोहन यादव सरकार को 60 दिनों की समय-सीमा के भीतर याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन का निराकरण करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
📜 क्या है पूरा मामला: पदोन्नति में TET की अनिवार्यता पर उठा था सवाल
यह याचिका अनिल कुमार तोमर एवं अन्य शिक्षकों की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 1997 से 1999 के बीच शिक्षाकर्मी वर्ग-2 और वर्ग-3 के पदों पर हुई थी। वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया में TET उत्तीर्ण करने को अनिवार्य कर दिया गया है। याचिका में तर्क दिया गया कि राष्ट्रीय स्तर और देश के अन्य राज्यों में 3 सितंबर 2001 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को पदोन्नति के लिए TET से छूट दी गई है, इसलिए मध्य प्रदेश में भी यही नियम लागू होना चाहिए।
⏱️ 60 दिनों के भीतर मोहन सरकार को लेना होगा अंतिम फैसला
शिक्षकों द्वारा पूर्व में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष इस संबंध में अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया था, परंतु लंबे समय तक कोई निर्णय न होने पर वे हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे थे। एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के आवेदनों का पूर्व दृष्टांतों के आधार पर 60 दिनों की अवधि के भीतर विधि सम्मत निराकरण किया जाए। हाईकोर्ट के इस रुख से 1997-1999 के दौरान भर्ती हुए हजारों सरकारी शिक्षकों में पदोन्नति की उम्मीद जग गई है।
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