मध्य प्रदेश में धान की कटाई के साथ बढ़ी पराली जलाने की घटनाएं, शुरुआती दौर में ही प्रदेश पहले नंबर पर
मध्य प्रदेश में धान की कटाई शुरू होने के साथ ही पराली जलाने के मामलों में तेजी आई है। शुरुआती दौर में ही एमपी के पहले स्थान पर पहुंचने से चिंता बढ़ गई है।
ग्वालियर। प्रदेश में धान की कटाई का कार्य शुरू होने के साथ ही किसानों द्वारा खेतों में अवशेष (पराली) जलाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। धान कटाई के बेहद शुरुआती दौर में ही मध्य प्रदेश के देश भर में पहले स्थान पर पहुंच जाने से पर्यावरणविदों और कृषि विभागों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) की विशेष इकाई 'कंसोर्टियम फॉर रिसर्च एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग सैटेलाइट' के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है।
📊 15 सितंबर से 13 अक्टूबर के बीच दर्ज हुईं 340 घटनाएं, गुना जिला देश में तीसरे नंबर पर
उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 15 सितंबर से 13 अक्टूबर के बीच प्रदेशभर में पराली जलाने की कुल 340 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समान अवधि में प्रदेश में केवल 55 घटनाएं ही दर्ज की गई थीं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अकेले गुना जिले में पराली जलाने के सबसे अधिक 45 मामले सामने आए हैं, जिसके चलते गुना देश भर में तीसरे नंबर का जिला बन गया है। बढ़ते प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता को बचाने के लिए प्रशासन द्वारा किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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