एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच का बड़ा फैसला, राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन की याचिका खारिज
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर 10 अगस्त की अधिसूचना को वैध माना है।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य परिवहन प्राधिकरण (State Transport Authority) के पुनर्गठन और अधिसूचना को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बुधवार को दिए अपने फैसले में राज्य सरकार द्वारा जारी 10 अगस्त 2026 की अधिसूचना को पूर्णतः वैधानिक और मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप माना। इसके साथ ही प्राधिकरण के गठन के खिलाफ उठाई गई सभी आपत्तियों को अदालत ने खारिज कर दिया।
📜 याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्तियां: ग्वालियर से मुख्यालय न हटाने की उठाई गई थी मांग
हरिशंकर सिंह पटेल एवं अन्य द्वारा दायर इस याचिका में राज्य सरकार द्वारा 9 फरवरी 2026 और 10 अगस्त 2026 को जारी की गई अधिसूचनाओं को कानूनी चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि मोटरयान अधिनियम की धारा 68 के तहत प्राधिकरण का गठन निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार होना चाहिए। इसके अलावा याचिका में यह विशेष मांग भी रखी गई थी कि चूंकि परिवहन आयुक्त का मुख्य कार्यालय ग्वालियर में स्थित है, इसलिए राज्य परिवहन प्राधिकरण का मुख्यालय भी ग्वालियर से बाहर स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने सरकार के पक्ष को सही ठहराते हुए याचिका निरस्त कर दी।
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