सिंहस्थ महापर्व में सिख समाज संभालेगा सेवा का जिम्मा, SGPC और गुरु सिंह सभा की बैठक में हुआ फैसला

उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए सिख समाज ने 24 घंटे लंगर, चिकित्सा शिविर और हेल्पलाईन सुविधाओं की तैयारी शुरू की है। एसजीपीसी की बैठक में जीर्णोद्धार पर निर्णय लिया गया।

Oct 15, 2026 - 20:20
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सिंहस्थ महापर्व में सिख समाज संभालेगा सेवा का जिम्मा, SGPC और गुरु सिंह सभा की बैठक में हुआ फैसला

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन 'सिंहस्थ महापर्व 2028' की तैयारियों के बीच उज्जैन में सिख समाज की प्रस्तावित भव्य सेवा व्यवस्था चर्चा के केंद्र में आ गई है। पंजाब के अमृतसर स्थित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सचिव एस. बलविंदर सिंह कलहवान के नेतृत्व में उज्जैन और इंदौर के पदाधिकारियों तथा समाजसेवियों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उज्जैन के अति प्राचीन 'गुरु नानक घाट' और अन्य ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार के साथ-साथ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे अटूट लंगर, मुफ्त चिकित्सा शिविर, दवाइयां, आवास, परिवहन और मार्गदर्शन के लिए विशेष हेल्पलाइन शुरू करने पर सहमति बनी है।

🍲 निःस्वार्थ भाव से होगी श्रद्धालुओं की खिदमत: लंगर से लेकर बर्तन सफाई तक संभालेंगे सेवादार

उज्जैन में गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष इकबाल सिंह गांधी ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु अवंतिका नगरी पहुँचेंगे। इतने बड़े आयोजन में दिन-रात भोजन और प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती होती है। सिख समाज की प्रस्तावित योजना के तहत शिप्रा नदी के तट पर स्थित प्राचीन गुरुद्वारे की सामुदायिक रसोई में 24 घंटे लंगर की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। गुरुद्वारे में भोजन पकाने से लेकर श्रद्धालुओं को परोसने, बर्तन धुलने और स्वच्छता बनाए रखने तक का काम बड़ी संख्या में सेवादार बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के स्वैच्छिक रूप से संभालेंगे।

📞 प्रशासनिक समन्वय से चलेगी हेल्पलाईन: घाटों की सफाई में महिला-पुरुष और बच्चे लेंगे हिस्सा

धार्मिक आयोजनों में दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को ठहरने की जगह ढूंढने और सही रास्तों की जानकारी पाने में कठिनाई होती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक समन्वय से एक समर्पित हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। उज्जैन गुरुनानक गुरुद्वारा घाट के प्रमुख बाबा त्रिलोचन सिंह और समाज के प्रवक्ता एस.एस. नारंग ने बताया कि बैठक में अमृतसर, इंदौर और उज्जैन के सभी प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने बताया कि शिप्रा नदी के घाटों की निरंतर सफाई और रखरखाव में उज्जैन के स्थानीय सेवादार, महिलाएं, पुरुष और बच्चे बढ़-चढ़कर भाग लेंगे और श्रद्धालुओं को सुगम अनुभव प्रदान करेंगे।

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