महाकाल की नगरी में सती माता मंदिर का अनोखा रहस्य, पेड़ों पर टंगी तस्वीरें और तंत्र क्रियाएं खींचती हैं ध्यान

उज्जैन में विक्रांत भैरव मंदिर के पास स्थित सती माता (मेलडी माता) मंदिर अपनी विशिष्ट तंत्र परंपराओं और गुप्त साधनाओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।

Oct 16, 2026 - 16:35
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महाकाल की नगरी में सती माता मंदिर का अनोखा रहस्य, पेड़ों पर टंगी तस्वीरें और तंत्र क्रियाएं खींचती हैं ध्यान

उज्जैन। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में आस्था और लोक परंपराओं से जुड़े कई ऐसे विशिष्ट धार्मिक स्थल हैं, जिनकी पहचान मुख्यधारा के मंदिरों से काफी अलग है। शिप्रा तट पर विक्रांत भैरव मंदिर के समीप स्थित सती माता का मंदिर, जिन्हें स्थानीय रूप से 'मेलडी माता' के नाम से भी जाना जाता है, ऐसा ही एक अनोखा केंद्र है। यहाँ देवी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा के साथ-साथ परिसर में हवन-यज्ञ, दर्जनों पेड़ों पर कीलों से ठुकी लोगों की तस्वीरें, नींबू-मिर्च, पुतले और सैंडल टंगे नजर आते हैं। इन अजीबोगरीब वस्तुओं के पीछे जुड़ी गहरी धार्मिक और तांत्रिक मान्यताएं इस मंदिर को पूरे देश में विशिष्ट बनाती हैं।

🔮 न्यायालय, शत्रु बाधा और गृह क्लेश से मुक्ति के लिए आते हैं श्रद्धालु, गुप्त रूप से होती हैं तांत्रिक क्रियाएं

मंदिर परिसर में साधना करने वाले तांत्रिक भय्यू महाराज के अनुसार, विशेष रूप से नवरात्र, चौदस और अमावस्या की तिथियों पर यहाँ देश के कोने-कोने से तांत्रिक और श्रद्धालु पहुँचते हैं। लोग न्यायालय में लंबित मुकदमों, शत्रुओं के भय, गृह क्लेश और वैवाहिक जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए तंत्र क्रिया के माध्यम से देवी की पूजा-अर्चना करते हैं। पूजन और यज्ञ में आहुति देने के बाद परिसर के पेड़ों पर तस्वीरों को बांधा जाता है। हालाँकि, इन गुप्त तांत्रिक प्रक्रियाओं के सार्वजनिक प्रकटन से परहेज किया जाता है। गुजरात की लोक परंपराओं में पूजनीय संकटमोचिका मेलडी माता के इस मंदिर में बड़ी संख्या में मध्य प्रदेश और गुजरात से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुँचते हैं।

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