वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने ग्वालियर में 21 अक्टूबर से 'दीपोत्सव स्वदेशी मेला', 30 हजार वर्गफुट में बनेगा कृत्रिम गांव
ग्वालियर में 21 अक्टूबर से 4 नवंबर तक भव्य 'स्वदेशी मेला' लगेगा। 500 स्टॉल्स, पूरी तरह प्लास्टिक फ्री जोन और 30 हजार वर्गफुट में बना कृत्रिम गांव इसका मुख्य आकर्षण होंगे।
ग्वालियर। भारत में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय व्यापारियों को मजबूत मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ग्वालियर में एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। दिवाली से ठीक पहले 21 अक्टूबर से शहर में विशाल 'स्वदेशी मेला' आयोजित किया जा रहा है। ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण, स्वदेशी जागरण मंच और 'कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (CAIT) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस मेले में करीब 500 दुकानें लगाई जाएंगी। खास बात यह है कि इस मेले में कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों के साथ-साथ बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां भी अपने दुपहिया और चार पहिया वाहन व आधुनिक प्रोडक्ट्स लेकर शिरकत करेंगी।
🚫 पूरी तरह से 'प्लास्टिक फ्री जोन' होगा मेला परिसर, 4 नवंबर तक चलेगा आयोजन
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने बताया कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और चीनी व विदेशी सामानों पर निर्भरता को खत्म करना है। इसे एक विशेष 'दीपोत्सव स्वदेशी मेले' के रूप में मनाया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए पूरे मेला परिसर को 'प्लास्टिक फ्री जोन' घोषित किया गया है, जहाँ पानी की प्लास्टिक बोतलों की बिक्री पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन ने बताया कि यह मेला 21 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलेगा। इसमें उत्तराखंड, हिमाचल, राजस्थान और पंजाब समेत कई राज्यों के व्यापारी शामिल होंगे, जबकि ग्वालियर के स्थानीय व्यापारियों के लिए 150 दुकानें विशेष रूप से आरक्षित रखी गई हैं।
🌾 'वोकल फॉर लोकल' और स्वदेशी स्टार्टअप्स को बढ़ावा, 30 हजार वर्गफुट में दिखेगा इको-फ्रेंडली कृत्रिम गांव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और स्वदेशी स्टार्टअप्स के विजन को ध्यान में रखते हुए इस मेले में छोटे उद्यमियों को अपना बाजार स्थापित करने का मौका मिलेगा। मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 30 हजार वर्गफुट के क्षेत्र में बनाया जा रहा एक विशेष 'कृत्रिम गांव' (Artificial Village) होगा। यह गांव पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को प्रदर्शित करेगा, जिसमें गोबर से बायो-गैस निर्माण, पारंपरिक ग्राम चौपालें, गौशालाओं का आध्यात्मिक व व्यावहारिक महत्व और ग्रामीण पर्यटन की मनमोहक झलक देखने को मिलेगी। इसके अलावा खाने-पीने के स्टॉल्स, हस्तशिल्प, सजावटी सामान और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
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