शाहपुर के सांदीपनि विद्यालय की अनोखी पहल, पढ़ाई के साथ बच्चों को सिखाई जा रही कथक और गरबा की बारीकियां

बुरहानपुर के शाहपुर स्थित सांदीपनि विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ कथक और लोकनृत्य सिखाया जा रहा है। नवरात्रि पर बच्चियों को विशेष गरबा ट्रेनिंग दी जा रही है।

Oct 16, 2026 - 19:06
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शाहपुर के सांदीपनि विद्यालय की अनोखी पहल, पढ़ाई के साथ बच्चों को सिखाई जा रही कथक और गरबा की बारीकियां

बुरहानपुर। जिले के शाहपुर क्षेत्र में स्थित सांदीपनि विद्यालय अपनी अनूठी शिक्षण शैली और प्रकृति से जुड़ाव के लिए जाना जाता है। अब इस सरकारी स्कूल में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को भारतीय संस्कृति, लोकनृत्य और संगीत से जोड़ने के लिए रोजाना विशेष कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। स्कूल में हर दिन इच्छुक विद्यार्थियों के लिए 45 मिनट का एक विशेष सत्र आयोजित किया जाता है, जिसमें कथक, लोकनृत्य, गायन और आधुनिक नृत्य की बारीकियों से बच्चों को रूबरू कराया जाता है। ग्रामीण अंचल के बच्चों को अपनी परंपराओं और कला से जोड़ने की यह पहल काफी सराही जा रही है।

💃 नवरात्रि पर्व के चलते स्कूल में चल रही स्पेशल गरबा क्लास, नन्हे-मुन्ने बच्चे सीख रहे गजब के स्टेप्स

इन दिनों देश भर में चल रहे नवरात्रि पर्व को देखते हुए सांदीपनि विद्यालय में छात्राओं और छोटे बच्चों के लिए विशेष गरबा प्रैक्टिस सत्र आयोजित किया जा रहा है। सोमवार से शनिवार तक लगने वाली इस डांस क्लास में बच्चों को पारंपरिक और आधुनिक गरबा गीतों की धुन पर एक से बढ़कर एक नए स्टेप्स सिखाए जा रहे हैं। स्कूली बच्चे भी इस गतिविधि में काफी उत्साह और उमंग दिखा रहे हैं। संगीत की सुमधुर धुनों पर बच्चों के थिरकते नन्हे कदम उनकी छिपी हुई सांस्कृतिक प्रतिभा को निखारने का काम कर रहे हैं।

🎓 पढ़ाई के साथ कला में भी भविष्य बना सकते हैं बच्चे, डांस टीचर और छात्रों ने साझा किए अनुभव

कक्षा 5वीं की छात्रा गायत्री ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक और संगीत की कक्षाएं लगती हैं, जहाँ इस समय उनकी टीम को नवरात्रि के लिए गरबा सिखाया जा रहा है। स्कूल की डांस शिक्षिका सावी फरकले ने बताया कि इस क्लास में बच्चे अपनी रुचि के अनुसार नृत्य सीखते हैं। उन्होंने कहा कि डांस और आर्ट्स के क्षेत्र में करियर बनाने का काफी बड़ा स्कोप है। खुद का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूल में डांस टीचर के रूप में पदस्थ होकर वे बच्चों का मार्गदर्शन कर रही हैं, जिससे बच्चे अपनी बहुमुखी प्रतिभा के दम पर अपना बेहतर भविष्य संवार सकते हैं।

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