फिल्म 'प्रहार' के प्रमोशन के दौरान बोले मशहूर वकील उज्जवल निकम, डेथ पेनल्टी और मर्सी पिटिशन पर तय होनी चाहिए टाइमलिमिट

इंदौर में फिल्म 'प्रहार' के प्रमोशन पहुंचे पद्मश्री उज्जवल निकम ने विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को अराजकता बताया। साथ ही फांसी की सजा और मर्सी पिटिशन पर टाइमलिमिट की वकालत की।

Oct 16, 2026 - 19:44
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फिल्म 'प्रहार' के प्रमोशन के दौरान बोले मशहूर वकील उज्जवल निकम, डेथ पेनल्टी और मर्सी पिटिशन पर तय होनी चाहिए टाइमलिमिट

इंदौर। देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील, राज्यसभा सदस्य और पद्मश्री से सम्मानित उज्जवल निकम ने विपक्षी दलों के हालिया विरोध प्रदर्शनों को तीखे शब्दों में 'अराजकता' करार दिया है। इंदौर में अपनी आगामी फिल्म 'प्रहार' के प्रमोशन और एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे उज्जवल निकम ने दो टूक कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को हटाने के लिए कानून की सीमा लांघकर आंदोलन करना कतई उचित नहीं है। यदि देश में इस तरह का चलन चल पड़ा, तो हर व्यक्ति अपनी मांग को लेकर कानून को ताक पर रखने लगेगा, जो कि हमारे संविधान और कानून व्यवस्था के लिए बेहद घातक साबित होगा।

🏛️ रवींद्र नाट्य गृह के कार्यक्रम में राहुल गांधी और विपक्षी दलों को दी नसीहत, संवैधानिक संस्थाओं पर उठाए सवाल

इंदौर के रवींद्र नाट्य गृह में 'संस्था सार्थक' द्वारा आयोजित 'साहस, संकल्प और न्याय की एक प्रेरणादायी शाम' के कार्यक्रम के दौरान चर्चा करते हुए उज्जवल निकम ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे विरोध पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मांगों को कानून के विरुद्ध जाकर उठाना गलत है और ऐसे प्रदर्शनों का फायदा देश-विरोधी ताकतें उठा सकती हैं, इसलिए राजनीतिक दलों को इससे बचना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ धरने-प्रदर्शन होने लगे, तो देश की न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था नष्ट हो जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने जजों को भी नसीहत दी कि वे जब तक न्यायिक आदेश का हिस्सा न हो, तब तक अतिरिक्त टिप्पणियों (एक्स्ट्रा कमेंट्स) से बचें।

⏳ फांसी की सजा और दया याचिका (मर्सी पिटिशन) के निष्पादन पर समय सीमा तय करने की उठाई मांग

कार्यक्रम के दौरान चर्चित मामलों और न्याय प्रक्रिया पर बात करते हुए उज्जवल निकम ने मुस्कान और साहिल हत्याकांड में फांसी की सजा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हत्या जैसे गंभीर अपराधों में कानून पहले से सख्त है, लेकिन मौत की सजा (डेथ पेनल्टी) के एग्जीक्यूशन में 10-10 साल का लंबा वक्त लग जाता है। उन्होंने मांग की कि डेथ पेनल्टी के साथ-साथ राष्ट्रपति के समक्ष दायर की जाने वाली दया याचिका (मर्सी पिटिशन) के निपटारे के लिए भी एक निश्चित टाइमलिमिट (समय सीमा) तय होनी चाहिए।

🎬 मुंबई ब्लास्ट और पाकिस्तानी साजिश पर आधारित फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी' का किया जिक्र

अपनी बायोपिक और फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी' के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस फिल्म में मुंबई बम ब्लास्ट मामले और उसकी अदालती सुनवाई के दौरान उनके द्वारा किए गए संघर्ष व पाकिस्तान की संलिप्तता के हर पहलू को बारीकी से दिखाया गया है, जिसमें अभिनेता राजकुमार राव मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।

 

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