प्रतिबंधित खरपतवार नाशक 'पैराक्वाट क्लोराइड' का खेतों में धड़ल्ले से इस्तेमाल, फेफड़े और किडनी के लिए बना गंभीर खतरा

रतलाम में फसलों को जल्दी सुखाने के लिए प्रतिबंधित केमिकल पैराक्वाट क्लोराइड (ग्रामोक्सोन) का खतरनाक इस्तेमाल जारी है। जानिए फेफड़े और किडनी पर इसके दुष्प्रभाव।

Oct 16, 2026 - 19:50
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प्रतिबंधित खरपतवार नाशक 'पैराक्वाट क्लोराइड' का खेतों में धड़ल्ले से इस्तेमाल, फेफड़े और किडनी के लिए बना गंभीर खतरा

रतलाम। साल में तीन फसलें लेने की होड़ और हरी-भरी फसलों को जल्दी सुखाने के चक्कर में अनजाने में किसान अपने खेतों में एक बेहद खतरनाक केमिकल का छिड़काव कर रहे हैं। मूंग, मूंगफली, उड़द और अरहर जैसी फसलों को समय से पहले सुखाकर उनकी कटाई (हार्वेस्टिंग) करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 'पैराक्वाट क्लोराइड' (Paraquat Dichloride) नामक खरपतवार नाशक पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कड़ा प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद रतलाम समेत मध्य प्रदेश के कई अंचलों में यह घातक रसायन अब भी खुलेआम बिक रहा है। विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, इस केमिकल के सीधे संपर्क में आने या इसका असरदार अंश खाद्य पदार्थों में पहुँचने से फेफड़ों और किडनी पर जानलेवा दुष्प्रभाव पड़ता है।

🚫 'ग्रामोक्सोन' नाम से बाजार में उपलब्ध है यह केमिकल, 1980 के दशक से भारत में हो रहा था इस्तेमाल

'पैराक्वाट क्लोराइड' बाजार में आमतौर पर 'ग्रामोक्सोन' के नाम से बिकता है। 1980 के दशक से भारत में इसका उपयोग मुख्य रूप से खरपतवार हटाने के लिए किया जाता रहा है। दुनिया के कई देशों में इसके गंभीर स्वास्थ्य खतरों को देखते हुए इस पर बहुत पहले बैन लगा दिया गया था। भारत में भी सरकार ने इसके इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया है। कृषि विभाग रतलाम के उपसंचालक बी. एस. अर्गल ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत इस दवा की बिक्री पर पूर्ण रोक लगाई जा रही है। जहाँ भी इस रसायन की बिक्री या भंडारण की सूचना मिलेगी, वहाँ कृषि विभाग की टीमों द्वारा छापेमारी कर सामग्री जब्त की जाएगी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

🌾 24 घंटे में सुखा देता है हरी फसल, प्रगतिशील किसानों ने जताई चिंता; सख्त प्रतिबंध की उठाई मांग

बाजार में कीटनाशक विक्रेताओं ने अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए किसानों को यह केमिकल फसल जल्दी पकाने के नाम पर बेचना शुरू किया था। मूंग और उड़द की हरी-भरी फसल पर इसका छिड़काव करने से मात्र 24 घंटे में पौधे पूरी तरह सूख जाते हैं, जिससे किसान आगामी फसल की बुवाई जल्दी कर पाते हैं। प्रगतिशील किसान अरविंद पाटीदार ने चिंता जताते हुए कहा कि कई किसान इस रसायन के घातक परिणामों से अनजान हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने इसे पूरी तरह बैन कर दिया है, तो फिर यह अब भी बाजार में कैसे उपलब्ध है? किसानों का कहना है कि प्रशासन को इसके अवैध निर्माण और बिक्री नेटवर्क पर नकेल कसनी चाहिए।

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