पीथमपुर में कचरा जलाने के बाद बची राख पर हाईकोर्ट सख्त, वकीलों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश
भोपाल यूनियन कार्बाइड कचरे की राख में पारे की मात्रा पर हाईकोर्ट सख्त। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सौंपी रिपोर्ट, वकीलों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश।
जबलपुर। भोपाल स्थित कुख्यात यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को नष्ट करने के बाद बची हुई राख में पारे (Mercury) की मौजूदगी से जुड़े मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए कड़ा निर्देश दिया है कि आगामी सुनवाई के दौरान सभी संबंधित पक्षों के अधिवक्ता व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दलीलें नहीं सुनी जाएंगी।
🏭 क्या है पूरा मामला? पीथमपुर में कचरा नष्ट करने के बाद पानी और राख की जांच पर गरमाया विवाद
वर्ष 2004 में आलोक प्रताप सिंह द्वारा यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण को लेकर याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर धार जिले के पीथमपुर में कचरे को नष्ट किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया था कि कचरा हटने के बावजूद आसपास के क्षेत्रों में दूषित पानी की आपूर्ति का खतरा बना हुआ है। इस पर कोर्ट ने पानी और अब कचरे के जलाने के बाद बची राख में पारे की उपस्थिति को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट तलब की थी। बोर्ड की रिपोर्ट में राख में पारा मिलने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
🔍 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर अब 27 नवंबर को होगी अगली सुनवाई: वकीलों को व्यक्तिगत रूप से रहना होगा मौजूद
सरकार की ओर से पक्ष रखा गया कि बोर्ड के अनुसार सभी पैरामीटर तय सीमा के भीतर हैं, लेकिन राख में पारे की मौजूदगी पर कोर्ट ने पैनी नजर बनाए रखी है। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की गई है, जिसमें सभी पक्षों के वकीलों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर अपने तर्क प्रस्तुत करने होंगे।
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