ब्रिटिश काल से भी पुराना है छिंदवाड़ा का यह ऐतिहासिक मंदिर, राज्य संरक्षित स्मारक घोषित
छिंदवाड़ा के 1200 साल पुराने गोदड़देव मंदिर का इतिहास। कलेक्टर के सपने और चमत्कार से जुड़ी है मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा की स्थापना की कहानी।
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक ऐसा दिव्य और ऐतिहासिक मंदिर स्थित है, जो अपनी अलौकिक मान्यताओं और प्राचीन देवी प्रतिमा के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। कलेक्टर बंगले के ठीक बाजू में स्थित गोदड़देव मंदिर में विराजी मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा लगभग 1200 वर्ष से भी अधिक पुरानी बताई जाती है। इस मंदिर का इतिहास ब्रिटिश शासन काल से भी पुराना माना जाता है, और इसकी स्थापना के पीछे एक बेहद दिलचस्प और चमत्कारी घटना जुड़ी हुई है।
सपना और देवी का आदेश: ऐसे हुई थी प्राचीन मूर्ति की स्थापना
इतिहास के जानकारों और प्रोफेसर अमोल भारद्वाज के अनुसार, वर्ष 1982 में नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के उत्खनन के दौरान प्राप्त इस चमत्कारी मूर्ति को तत्कालीन कलेक्टर एन.पी. तिवारी सुरक्षा की दृष्टि से कलेक्ट्रेट की ट्रेजरी में ले आए थे। इसके बाद कलेक्टर की धर्मपत्नी को एक रहस्यमय स्वप्न आया, जिसमें माता ने स्वयं को सुरक्षित स्थान पर स्थापित करने को कहा। इसके अलावा, घर के रसोइया को भी देवी आने पर यही संदेश मिला। जिसके बाद कलेक्टर ने कलेक्ट्रेट के पास इस दिव्य प्रतिमा को स्थापित करवा दिया, जो आज एक भव्य मंदिर का रूप ले चुका है। अप्रैल 2023 में मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा इस प्राचीन गोदड़देव मंदिर को 'राज्य संरक्षित स्मारक' भी घोषित किया जा चुका है।
🌸 नवरात्रि में उमड़ता है भक्तों का सैलाब: हर मनोकामना होती है पूरी
स्थानीय बुजुर्गों और मंदिर समिति के सदस्यों का कहना है कि अंग्रेजों के शासनकाल में इस पावन स्थल पर एक छोटी सी मड़िया हुआ करती थी। आज यह मंदिर अपनी प्राचीनता और दिव्यता के कारण क्षेत्र की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर यहाँ सुबह से ही दूर-दूर से आने वाले भक्तों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि सच्चे मन से जो भी भक्त मां सिद्धिदात्री के दरबार में अपनी मुराद लेकर आता है, माता उसकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।
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