विधायक मोंटू सोलंकी ने खोली नल-जल योजना की पोल, ₹2.07 करोड़ स्वीकृत होने के बावजूद झिरीजामली में नहीं पहुंचा पानी
सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने झिरीजामली गांव में नल-जल योजना का औचक निरीक्षण किया। ₹2.07 करोड़ खर्च के बाद भी घरों में पानी न पहुंचने पर जताई नाराजगी।
सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने झिरीजामली में नल-जल योजना की खोली पोल, ₹2.07 करोड़ स्वीकृत होने के बावजूद घरों तक नहीं पहुंचा पानी
झिरीजामली। सेंधवा विधायक श्री मोंटू सोलंकी जी आज ग्राम झिरीजामली पहुंचे, जहां उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के जिला अधिकारियों के साथ नल-जल योजना की जमीनी हकीकत का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि योजना के तहत आज तक एक भी घर में पानी नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए आज भी दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है।
विधायक श्री मोंटू सोलंकी जी के गांव पहुंचने पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ महिलाएं भी अपनी पानी की समस्या लेकर पहुंचीं। महिलाओं ने विधायक जी को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की व्यवस्था करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “विधायक भैया, हम बहुत परेशान हैं। अधिकारी गांव में आते हैं, आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन पानी आज तक नहीं मिला। आप अधिकारियों से पूछिए कि आखिर हमें पानी कब मिलेगा? हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, घरों में पानी चाहिए।” महिलाओं की इस पीड़ा से गांव में नल-जल योजना की वास्तविक स्थिति सामने आई।

गौरतलब है कि ग्राम झिरीजामली में नल-जल योजना के लिए ₹2 करोड़ 7 लाख की राशि स्वीकृत होने के बावजूद ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की एक बूंद भी घरों तक नहीं पहुंची, लेकिन ग्राम पंचायत को बिजली का करीब ₹12 लाख का बिल थमा दिया गया है। एक फलिये में बोर तो कर दिया गया, लेकिन उसमें आज तक मोटर पंप नहीं लगाया गया। वहीं, बिजली के पोल भी गाड़ दिए गए, जिनमें से एक पोल उखड़ चुका है। इसके बावजूद करीब ₹1 लाख का बिजली बिल दे दिया गया। यह स्थिति योजना के क्रियान्वयन और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
विधायक श्री मोंटू सोलंकी जी ने विधानसभा में PHE विभाग द्वारा दी गई जानकारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग ने लिखित जानकारी में बताया है कि सेंधवा विधानसभा क्षेत्र के कुल 70 गांवों में नल-जल योजना का कार्य किया जा रहा है और 53 गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू हो चुकी है। विधायक जी ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि यदि वास्तव में 53 गांवों में पानी पहुंच रहा है, तो किसी भी गांव में चलकर जमीनी स्थिति की जांच कर ली जाए।
विधायक श्री मोंटू सोलंकी जी ने कहा कि अधिकारियों ने स्वयं जानकारी दी थी कि ग्राम झिरीजामली में पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसी दावे की वास्तविकता जानने के लिए जब वे अधिकारियों के साथ झिरीजामली पहुंचे, तो जमीनी हकीकत विभागीय दावों से बिल्कुल अलग सामने आई। ग्रामीणों और महिलाओं ने बताया कि उनके घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे विधानसभा में दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति के बीच गंभीर अंतर सामने आया है।
विधायक जी ने कहा कि झिरीजामली की स्थिति सामने आने के बाद उन अन्य गांवों की भी जांच आवश्यक है, जिनके बारे में विभाग पानी की आपूर्ति शुरू होने का दावा कर रहा है। जिन गांवों के नाम विभाग द्वारा बताए जा रहे हैं, वहां भी वास्तविक स्थिति दावों से अलग हो सकती है। इसलिए केवल कागजों में योजना पूरी बताने के बजाय प्रत्येक गांव में मौके पर जाकर जांच की जानी चाहिए, ताकि जनता के सामने वास्तविक स्थिति आ सके।

निरीक्षण के दौरान पाइपलाइन बिछाने के कार्य में भी गंभीर अनियमितता सामने आई। विधायक जी ने बताया कि निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार पाइपलाइन को जमीन से लगभग 3 फीट नीचे बिछाया जाना चाहिए, लेकिन गांव में कई जगह पाइपलाइन जमीन के ऊपर ही बिछाई गई है। यह कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब पाइपलाइन बिछाने में ही निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो योजना की गुणवत्ता और उसकी उपयोगिता की जांच करना आवश्यक है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब पांच महीने पहले भी PHE विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे थे और लिखित रूप में आठ दिनों के भीतर कार्य पूरा कर पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद आज तक न काम पूरा हुआ और न ही घरों में पानी पहुंचा। बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। महिलाओं ने विधायक जी से आग्रह किया कि अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ताकि उन्हें रोजाना पानी के लिए परेशान न होना पड़े।
आज निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारी ने एक बार फिर आठ दिन का समय मांगा। इस पर विधायक श्री मोंटू सोलंकी जी ने नाराजगी जताते हुए अधिकारी को स्पष्ट चेतावनी दी कि विधानसभा में दी गई जानकारी और गांव की वास्तविक स्थिति में अंतर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।

विधायक श्री मोंटू सोलंकी जी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तय समय-सीमा में योजना का कार्य पूरा कर ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंचाया जाए। साथ ही पाइपलाइन बिछाने के कार्य की गुणवत्ता, निर्धारित मानकों के पालन और बिजली बिल से संबंधित मामले की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन और विभाग की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़े और दूसरी ओर कागजों में योजना की सफलता के दावे किए जाएं, यह स्वीकार्य नहीं है।
विधायक श्री मोंटू सोलंकी जी ने स्पष्ट संदेश दिया कि जनता के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को केवल कागजी जानकारी देने के बजाय गांवों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति सुनिश्चित करनी होगी। गांव की महिलाओं की परेशानी और ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि घर-घर पानी पहुंचाने से होगा।
करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद ग्रामीण प्यासे हैं। महिलाओं का सवाल है—आखिर उन्हें पानी कब मिलेगा? अब आश्वासन नहीं, घर-घर पानी चाहिए और विभागीय दावों की जमीनी जांच होनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण: ग्राम पटेल धरमसिंह कनोजे, सरपंच सुरेश सेनानी, पूर्व सरपंच संजय भादले, जितेंद्र कनोजे, विवेक मेहता, सर्जन डावर, परसराम पटेल, विनोद सोलंकी एवं सयाराम सेनानी।
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