जगदलपुर पहुंची मां दंतेश्वरी की छत्र और मां मावली की डोली, जिया डेरा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के अवसर पर जगदलपुर पहुंची मां दंतेश्वरी की छत्र और मां मावली की डोली। आज जिया डेरा में निभाई जाएगी 'मावली परघाव' की रस्म।
जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध और 75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के पावन अवसर पर जन-आस्था का अलौकिक और भव्य दृश्य देखने को मिल रहा है। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की छत्र और मां मावली की पवित्र डोली सोमवार सुबह जगदलपुर पहुंच चुकी हैं। दोनों दिव्य विग्रहों को शहर की सीमा पर स्थित गीदम रोड के 'जिया डेरा' में आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विराजमान किया गया है, जहां तड़के से ही जगदलपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। पारंपरिक मार्ग के सभी देवी स्थानों और देव-गुड़ियों में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ इस ऐतिहासिक यात्रा की परंपरा पूरी निष्ठा से निभाई जा रही है।
🌸 आज भव्य रूप से निभाई जाएगी 'मावली परघाव' की रस्म: गाजे-बाजे और पारंपरिक स्वागत के साथ राजमहल में होगा प्रवेश
बस्तर दशहरा के सबसे महत्वपूर्ण और भावुक विधानों में से एक 'मावली परघाव' (देवी मावली और दंतेश्वरी के स्वागत व अगवानी की परंपरा) आज मंगलवार को धूमधाम से निभाई जाएगी। बस्तर राजपरिवार के सदस्य, जनप्रतिनिधि, माझी-चालकी और पारंपरिक सेवादार गाजे-बाजे के साथ जिया डेरा पहुंचकर मांई जी का भव्य स्वागत करेंगे। यह रस्म बस्तर की प्राचीन आदिवासी संस्कृति और राजपरिवार के ऐतिहासिक संबंधों की अटूट मिसाल है। जिया डेरा में दर्शन के उपरांत मां दंतेश्वरी की छत्र और मावली की डोली को आदरपूर्वक राजमहल स्थित दंतेश्वरी मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
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