फिलीपींस और जबलपुर के वैज्ञानिकों ने खोजी धान की नई किस्में, कम पानी में मिलेगा दोगुना उत्पादन

जबलपुर के JNKVV और फिलीपींस के IRRI वैज्ञानिक मिलकर धान की ऐसी किस्में विकसित कर रहे हैं जो कम पानी और कम लागत में बेहतरीन उत्पादन देंगी।

Oct 21, 2026 - 19:03
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फिलीपींस और जबलपुर के वैज्ञानिकों ने खोजी धान की नई किस्में, कम पानी में मिलेगा दोगुना उत्पादन

जबलपुर। मध्य प्रदेश के किसानों के लिए जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV), जबलपुर से बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक फिलीपींस स्थित अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) के साथ मिलकर धान की ऐसी नई किस्मों पर शोध कर रहे हैं, जिन्हें बिना कीचड़ तैयार किए सीड ड्रिल मशीन से सीधे खेतों में बोया जा सकेगा। इस तकनीक (Direct Seeding) से न केवल पानी और मजदूरों की भारी बचत होगी, बल्कि उत्पादन भी पारंपरिक रोपाई विधि के बराबर ही मिलेगा। इसके अलावा, इन किस्मों में खरपतवारों को दबाने और बीमारियों से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता भी होगी।

🧪 चावल में बढ़ेंगे जिंक, मैग्नीशियम और आयरन जैसे पोषक तत्व: 12 जिलों में JR 49 और JR 83 किस्मों का सफल ट्रायल

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजय सिंह के अनुसार, इस शोध का मुख्य उद्देश्य धान को सूखा-रोधी बनाने के साथ-साथ उसकी पोषण गुणवत्ता में सुधार करना भी है। इसके लिए देसी और हाइब्रिड किस्मों का क्रॉस कराकर चावल में जिंक, मैग्नीशियम और आयरन जैसे आवश्यक खनिज तत्वों की मात्रा बढ़ाई जा रही है। विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में 1,000 से अधिक किस्मों का अध्ययन चल रहा है। फिलहाल विश्वविद्यालय द्वारा विकसित JR 49, JR 122 और JR 83 किस्मों के बीज प्रदेश के 12 जिलों में लगभग 1,200 से अधिक किसानों तक पहुंचाए गए हैं, जहां सीधी बिजाई से भी किसानों को बहुत ही सकारात्मक और बेहतरीन परिणाम मिले हैं।

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