जेल में बंद इमरान खान की सेहत को लेकर परिवार चिंतित, पाकिस्तान की सियासत पर एक नजर
पाकिस्तान के पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अस्पताल ले जाकर वापस जेल भेज दिया गया है। जानिए पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास और सत्ता के संघर्ष से जुड़ी पूरी कहानी।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और लगभग एक-दो घंटे की जांच के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। अगस्त 2023 से जेल में बंद इमरान खान की सेहत को लेकर उनका परिवार लगातार गहरी चिंता जता रहा है। उनकी बहन ने भी जेल के भीतर उनकी सुरक्षा और जान को लेकर गंभीर आशंकाएं व्यक्त की हैं, जबकि उनके खिलाफ कई कानूनी मामले अभी भी चल रहे हैं।
⚖️ पाकिस्तान की राजनीति का चक्र: जब इमरान पीएम थे और नवाज शरीफ जेल में थे
इमरान खान की यह स्थिति पाकिस्तान की राजनीति में कोई नई घटना नहीं है। यहाँ सत्ता और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का इतिहास पुराना है। आज भले ही इमरान खान सलाखों के पीछे हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब वे देश के प्रधानमंत्री थे और उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नवाज़ शरीफ जेल में बंद थे। साल 2017 में पनामा पेपर्स से जुड़े मामले में नवाज़ शरीफ को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी और उन्हें सजा हुई थी। बाद में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें लंदन जाने की अनुमति मिली। यह पाकिस्तान की राजनीति का वह स्याह सच है, जहां जो नेता सत्ता में रहते हुए विरोधी पर कार्रवाई करता है, कल वह खुद उसी व्यवस्था का शिकार बन जाता है।
📜 इतिहास के पन्ने: लियाकत अली खान से लेकर जुल्फिकार भुट्टो और बेनजीर तक का दर्दनाक अंजाम
पाकिस्तान के शासकों और शीर्ष नेताओं का राजनीतिक अंत अमूमन बेहद त्रासद रहा है। देश के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की 1951 में एक जनसभा के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद हुसैन शहीद सुहरावर्दी को भी जेल और निर्वासन का सामना करना पड़ा और 1963 में लेबनान में उनकी संदिग्ध परिस्थिति में मौत हुई। सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाने वाले जुल्फिकार अली भुट्टो को 1977 के तख्तापलट के बाद 1979 में फांसी दे दी गई। उनकी बेटी और दो बार प्रधानमंत्री रहीं बेनजीर भुट्टो की भी 2007 में रावलपिंडी में एक चुनावी रैली के बाद हत्या कर दी गई थी। इसी तरह तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज़ शरीफ और 1999 में तख्तापलट करने वाले जनरल परवेज़ मुशर्रफ को भी अपने जीवन के अंतिम दौर में सत्ता से बेदखल होना पड़ा और निर्वासन झेलना पड़ा।
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