UPI ट्रांजैक्शन पर MDR और GST राहत को लेकर क्या है तैयारी? छोटे व्यापारियों को मिल सकती है बड़ी राहत
जीएसटी काउंसिल की बैठक में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और जीएसटी को लेकर चर्चा की संभावना।
7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में कुछ बड़े यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और उस पर लगने वाले जीएसटी से राहत के तौर-तरीकों पर विचार किया जा सकता है. यह मुद्दा खासकर उन छोटे व्यापारियों के लिए बेहद अहम है जो जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं. मौजूदा नियमों के मुताबिक, जिन व्यवसायों का सालाना टर्नओवर निर्धारित सीमा (सामानों के लिए 40 लाख रुपए और सेवाओं के लिए 20 लाख रुपए) से कम होता है, उन्हें रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता से छूट मिलती है, लेकिन इसके चलते वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा नहीं कर पाते हैं.
💳 2. 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए MDR और GST नियमों का बिना रजिस्ट्रेशन वाले व्यापारियों पर पड़ेगा सीधा असर
आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपए से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होना है. चूंकि एमडीआर का पूरा वित्तीय बोझ मर्चेंट (व्यापारी) पर पड़ता है और बैंक सेटलमेंट के दौरान इसे काट लेते हैं, इसलिए रजिस्टर्ड कंपनियां तो आईटीसी रूट के जरिए इस टैक्स का एडजस्टमेंट कर सकती हैं, लेकिन बिना रजिस्ट्रेशन वाले छोटे व्यापारी इस लाभ से वंचित रह जाते हैं और यह टैक्स सीधा उनकी लागत बन जाता है.
⚖️ 3. टैक्स एक्सपर्ट्स की राय- वैल्यूएशन, इनवॉइसिंग और कैस्केडिंग-क्रेडिट से जुड़े विवादों को रोकने के लिए स्पष्टीकरण जरूरी
एकेएम ग्लोबल के इकेश नागपाल और रस्तोगी चैंबर्स के अभिषेक ए. रस्तोगी जैसे टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि काउंसिल को यह स्पष्ट करना चाहिए कि टैक्स योग्य रकम की गणना कैसे होगी और क्या यह केवल वास्तविक एमडीआर पर लगेगा या फ्लैट स्ट्रक्चर पर. विशेषज्ञों का सुझाव है कि एक व्यावहारिक और आसान इनवॉइसिंग तथा वैल्यूएशन फ्रेमवर्क तैयार किया जाना चाहिए, ताकि छोटे व्यापारियों को अनावश्यक वित्तीय बोझ और क्रेडिट संबंधी परेशानियों से बचाया जा सके.
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