जबलपुर में 'नो UPI डे' का आह्वान; UPI ट्रांजेक्शन टैक्स प्रस्ताव के खिलाफ सड़क पर उतरे संगठन

जबलपुर में यूपीआई (UPI) पेमेंट पर प्रस्तावित टैक्स के खिलाफ सामाजिक संगठनों ने खोला मोर्चा! सिविक सेंटर में प्रदर्शन कर 'नो UPI डे' मनाने की अपील की।

Sep 23, 2026 - 17:55
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जबलपुर में 'नो UPI डे' का आह्वान; UPI ट्रांजेक्शन टैक्स प्रस्ताव के खिलाफ सड़क पर उतरे संगठन

जबलपुर। डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित टैक्स के कड़े विरोध में मध्य प्रदेश के जबलपुर में कई सामाजिक और उपभोक्ता संगठन एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए हैं। सिविक सेंटर में विभिन्न संगठनों से जुड़े नागरिकों ने एकत्र होकर केंद्र सरकार से यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आम जनता से अपील की कि वे आज यूपीआई के बजाय केवल नकद (Cash) भुगतान करें और सरकार तक अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएं।

💸 'आम जनता और छोटे व्यापारियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ': उपभोक्ता संगठनों ने जताई चिंता

विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि यूपीआई आज हर भारतीय की रोजमर्रा की जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह लोग धड़ल्ले से डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में अगर यूपीआई लेनदेन पर किसी भी प्रकार का टैक्स या मर्चेंट शुल्क लगाया जाता है, तो इसका सीधा आर्थिक बोझ मध्यवर्गीय ग्राहकों और छोटे व्यापारियों की जेब पर ही पड़ेगा।

⚖️ 'धारा 10 के तहत क्यों नहीं मांगी गईं आपत्तियां?': डॉक्टर नाज पांडे ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल

जबलपुर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के संरक्षक डॉ. पी.जी. नाज पांडे ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट (Payment and Settlement Systems Act) की धारा 10 के अनुसार, ऐसा कोई भी फैसला लागू करने से पहले आम जनता और व्यापारी संगठनों से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए जाने चाहिए थे। सरकार ने बिना किसी जन-परामर्श के यह कदम उठाने की कोशिश की है, जिसका पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

📉 छोटे कारोबारियों का मुनाफा खत्म होने का खतरा: ₹2000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% शुल्क का डर

जबलपुर के थोक कारोबारी साहिल सिंह ने व्यापारियों की व्यावहारिक समस्या को उजागर करते हुए बताया कि कई बार ₹2000 के सामान पर व्यापारी का शुद्ध मुनाफा केवल ₹10 से ₹20 ही होता है।

ऐसी स्थिति में यदि ₹2000 से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया, तो छोटे दुकानदारों का मुनाफा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। नतीजतन व्यापारियों को यह अतिरिक्त लागत मजबूरी में ग्राहकों पर ही डालनी पड़ेगी।

📱 'पहले आदत डाली, अब टैक्स का टेंशन': डिजिटल इंडिया के दावों पर उठे सवाल

सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त सुभाष चंद्रा ने कहा कि सरकार ने खुद ही देशवासियों को कैशलेस इकोनॉमी और डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रेरित किया था।

आज स्थिति यह है कि ज्यादातर लोग जेब में नकद पैसे लेकर नहीं चलते और रोजमर्रा की छोटी-बड़ी खरीदारी मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई से ही करते हैं। ऐसे में अचानक शुल्क थोपने से डिजिटल इंडिया की मुहिम को धक्का लगेगा और आम लोगों की मानसिक व वित्तीय परेशानी बढ़ेगी।

💵 'नो यूपीआई डे' मनाने की अपील: नकद भुगतान कर सरकार तक संदेश पहुंचाने की मुहिम

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार को डिजिटल नीतियों को तय करते समय देश की आम जनता और छोटे कारोबारियों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विभिन्न उपभोक्ता और व्यापारी संगठनों ने जबलपुर के मुख्य बाजारों में संपर्क अभियान चलाकर लोगों से आज 'नो यू पी आई डे' (No UPI Day) मनाने, डिजिटल वॉलेट का उपयोग बंद करने और केवल कैश में लेनदेन करने का आग्रह किया है, ताकि सरकार तक विरोध का मजबूत संदेश पहुँच सके।

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