सागर बीएमसी में डॉक्टरों ने बचाई गर्भवती महिला और नवजात की जान; प्लेसेंटा प्रीविया और एनीमिया का जटिल केस
सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में डॉक्टरों ने प्लेसेंटा प्रीविया और एनीमिया से पीड़ित महिला और नवजात की जान बचाई! पढ़ें इस जटिल केस की पूरी रिपोर्ट।
सागर। भारत में गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में खून की अत्यधिक कमी (एनीमिया) के कारण मौत की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। गर्भावस्था में एनीमिया के साथ-साथ एक और अत्यंत गंभीर चिकित्सीय स्थिति बनती है, जिसे मेडिकल भाषा में 'प्लेसेंटा प्रीविया' (Placenta Previa) कहा जाता है। इसमें प्रसव के समय प्लेसेंटा (गर्भनाल) गर्भाशय के मुख्य द्वार (मुँह) को पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक लेता है। जब शिशु डिलीवरी के दौरान नीचे की ओर खिसकता है, तो अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) होने लगता है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों की जान पर बन आती है।
🏥 सागर बीएमसी में आया अत्यंत क्रिटिकल केस: मछरयाई की महिला प्लेसेंटा प्रीविया से थी पीड़ित
हाल ही में सागर जिले के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में ऐसा ही एक बेहद जटिल मामला सामने आया, जहाँ डॉक्टरों ने सूझबूझ से महिला और नवजात शिशु दोनों को नया जीवन दिया।
सागर के मछरयाई इलाके की रहने वाली एक महिला अपनी तीसरी गर्भावस्था के दौरान प्रसव के लिए बीएमसी में रेफर की गई थी। यह महिला गंभीर रूप से प्लेसेंटा प्रीविया की स्थिति से ग्रस्त थी। डिलीवरी का समय नजदीक आते ही उसे अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी।
💉 पहले भी भर्ती हो चुकी थी मरीज: पीआरबीसी (PRBC) चढ़ाकर डॉक्टरों ने किया सफल ऑपरेशन
बीएमसी में डिलीवरी के लिए पहुँची यह महिला पूर्व में भी हीमोग्लोबिन की गंभीर कमी (एनीमिया) के कारण अस्पताल में भर्ती हो चुकी थी।
उस समय डॉक्टरों ने 'ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर' तकनीक से तैयार किए गए पीआरबीसी (Packed Red Blood Cells - केवल लाल रक्त कणिकाएं) चढ़ाकर उसकी स्थिति को संभाला था। दोबारा अत्यधिक रक्तस्राव की शिकायत पर उसे बीएमसी के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती कराया गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तत्काल जटिल ऑपरेशन (सिजेरियन डिलीवरी) को अंजाम दिया।
🫁 वेंटीलेटर सपोर्ट पर रही मरीज: डॉ. सर्वेश जैन और कंसल्टेंट टीम ने दी नई जिंदगी
ऑपरेशन सफल होने के बावजूद मरीज की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई थी।
इसे देखते हुए एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सर्वेश जैन के मार्गदर्शन में मरीज को एनेस्थीसिया आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया गया। वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखते हुए मरीज को पुनः पीआरबीसी दिए गए। कंसल्टेंट इंचार्ज डॉ. अजय सिंह और पीजी डॉक्टर रजत की सतत निगरानी व उत्कृष्ट प्रबंधन से मरीज की स्थिति में सुधार आया और अब वह वेंटीलेटर से हटकर सामान्य रूप से सांस ले रही है।
🥗 'गर्भवती महिलाओं के पोषण पर ध्यान देना बेहद जरूरी': डॉ. सर्वेश जैन ने दी महत्वपूर्ण सलाह
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सर्वेश जैन ने बताया, "विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की लगातार चेतावनियों और केंद्र व राज्य सरकार की तमाम स्वास्थ्य योजनाओं के बावजूद भारत में आज भी 50 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। बार-बार और कम समय के अंतराल में गर्भवती होना इसका मुख्य कारण है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से ही महिलाओं के खान-पान, आयरन-फॉलिक एसिड की खुराक और उचित पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाना अति-आवश्यक है, ताकि ऐसी क्रिटिकल स्थितियों से बचा जा सके।"
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