शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ हाई कोर्ट की युगलपीठ में अपील, सड़क चौड़ीकरण का है विवाद
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ हाई कोर्ट की युगलपीठ में अपील दायर की गई है।
इंदौर। सिंहस्थ-2028 (Simhastha 2028) के दृष्टिगत प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण योजना की जद में आ रही उज्जैन (Ujjain) की लगभग सौ साल पुरानी ऐतिहासिक 'शाही मस्जिद' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मस्जिद के हिस्से को हटाने को लेकर हाई कोर्ट की एकलपीठ (Single Bench) द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देते हुए अब युगलपीठ (Double Bench) के समक्ष नई अपील दायर की गई है। इस बहुचर्चित मामले में अब अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि यह पूरी कार्रवाई उज्जैन के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर क्षेत्र में सुगम यातायात के लिए किए जा रहे सडक़ चौड़ीकरण के तहत की जा रही है।
🚜 मस्जिद प्रबंधन का दावा: 100 वर्ष पुरानी है धरोहर, 1975 में स्वेच्छा से दी थी जमीन
उज्जैन नगर निगम (Ujjain Municipal Corporation) द्वारा यातायात को सुचारू बनाने के लिए सडक़ चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे सभी तरह के अतिक्रमण और निर्माणों को हटाने की सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत शाही मस्जिद के उस हिस्से को भी हटाया जाना है जो प्रस्तावित चौड़ीकरण की जद में आ रहा है।
इस प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन और अन्य मुस्लिम पक्षों ने कड़ा विरोध जताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का मजबूती से दावा है कि यह शाही मस्जिद 100 वर्ष से भी अधिक पुरानी है और इसके निर्माण व अस्तित्व से जुड़े पुख्ता ऐतिहासिक दस्तावेज आज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वर्ष 1975 में जब यातायात को सुगम बनाने की बात उठी थी, तब मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से अपनी जमीन प्रशासन को दी गई थी और वर्तमान में वहां सड़क पहले से ही करीब 40 फीट चौड़ी है।
📜 राजपत्र का भी दिया गया हवाला, लेकिन एकलपीठ ने खारिज कर दी थी याचिका
याचिकाकर्ताओं ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए हाई कोर्ट के समक्ष ऐतिहासिक दस्तावेजों का भी हवाला दिया।
उन्होंने विशेष रूप से 17 मार्च 1925 के एक पुराने पत्र और 13 सितंबर 1985 को प्रकाशित मध्य प्रदेश शासन के राजपत्र (Gazette) का उल्लेख किया, जिनमें स्पष्ट रूप से इस शाही मस्जिद का जिक्र किया गया है। दोनों पक्षों की लंबी बहस और दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने मस्जिद प्रबंधन की याचिका को निरस्त (Dismiss) कर दिया था और नगर निगम की कार्रवाई को सही ठहराया था। एकलपीठ के इसी फैसले को अब युगलपीठ के समक्ष चुनौती दी गई है। मामले पर शुक्रवार को अहम सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्ट का निर्धारित समय समाप्त हो जाने के कारण इसे टाल दिया गया। अब सभी की निगाहें अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
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