भिंड के पैरा तैराक सतेंद्र सिंह लोहिया ने रचा इतिहास, लगातार तीसरी बार इंग्लिश चैनल फतह कर रोशन किया देश का नाम

भिंड के पैरा तैराक पद्मश्री सतेंद्र सिंह लोहिया ने लगातार तीसरी बार इंग्लिश चैनल पार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इंग्लैंड से फ्रांस तक तैराकी का सफर किया पूरा।

Sep 27, 2026 - 10:48
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भिंड के पैरा तैराक सतेंद्र सिंह लोहिया ने रचा इतिहास, लगातार तीसरी बार इंग्लिश चैनल फतह कर रोशन किया देश का नाम

भिंड: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के होनहार पैरा तैराक सतेंद्र सिंह लोहिया ने एक बार फिर अपनी अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार 'इंग्लिश चैनल' को सफलतापूर्वक पार कर देश और प्रदेश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। पांच सदस्यीय इस साहसी तैराक दल ने इंग्लैंड के डोवर से अपनी कठिन तैराकी शुरू की और करीब 21 घंटे 20 मिनट का लंबा सफर तय करके फ्रांस पहुंचकर एक नया और गौरवशाली कीर्तिमान स्थापित किया।

🏅 पद्मश्री सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं सतेंद्र लोहिया

मूल रूप से भिंड जिले की मेहगांव तहसील के अंतर्गत आने वाले गाता गांव के रहने वाले सतेंद्र सिंह लोहिया वर्तमान में इंदौर में वाणिज्य कर विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी असाधारण खेल उपलब्धियों और देश के लिए किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से अलंकृत कर चुकी है। इसके अलावा, खेल के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2014 में मध्य प्रदेश शासन ने उन्हें प्रतिष्ठित 'विक्रम अवार्ड' तथा वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने 'तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार' से सम्मानित किया था।

🌊 इस कठिन अभियान में दिव्यांग तैराक गजेंद्र सिंह भी रहे शामिल

इंग्लिश चैनल को पार करना किसी भी तैराक के अंतरराष्ट्रीय करियर की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। इस विशेष अभियान में भिंड जिले के ही एक अन्य प्रतिभावान दिव्यांग तैराक गजेंद्र सिंह कुशवाह भी शामिल रहे, जिन्होंने इस चुनौतीपूर्ण सफर में दल के 'रिजर्व सदस्य' के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई। दोनों तैराकों की इस सफलता से पूरे जिले और प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई है।

⚡ समुद्र की लंबी दूरी, तेज धाराएं और ठंडे पानी जैसी कठिन चुनौतियों का सामना

इंग्लिश चैनल के इस खतरनाक समुद्री जलडमरूमध्य को पार करना आसान नहीं होता है। इस दौरान तैराकों को अत्यधिक लंबी दूरी, समुद्र की तेज धाराओं, बर्फीले ठंडे पानी और लगातार बदलती मौसम की कठिन परिस्थितियों का डटकर सामना करना पड़ता है। इन तमाम बाधाओं को पार करते हुए सतेंद्र सिंह लोहिया ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।

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