अजयगढ़ के बहरनी टपरिया पहुंचे कलेक्टर, विस्थापित परिवारों से मिलकर समस्याओं के समाधान का दिया आश्वासन
पन्ना के अजयगढ़ में विभिन्न विकास परियोजनाओं से विस्थापित ग्रामीण भारी बारिश और पानी के बीच पिछले 15 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। प्रशासन ने लिया जायजा।
पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में बीते कई घंटों से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। इस प्रतिकूल मौसम के बावजूद अजयगढ़ के ग्राम बहरनी टपरिया में पिछले 15 दिनों से विभिन्न विकास परियोजनाओं के चलते विस्थापित हुए ग्रामीण लगातार धरने और आंदोलन पर बैठे हुए हैं। इस आंदोलन में केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांव डैम परियोजना, रुन्झ डैम परियोजना और सीधी-सिंगरौली रेल परियोजना के विस्थापित ग्रामीण प्रमुख रूप से शामिल हैं।
⛓️ बढ़ते जलस्तर और घुटनों तक पानी के बीच सूली पर लटककर और बेड़ियां पहनकर विरोध
यह अनूठा आंदोलन मझगांव डैम के बिल्कुल पास चल रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, इसके बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अडिग होकर डटे हुए हैं। स्थिति यह है कि आंदोलन स्थल पर घुटनों तक पानी भर चुका है। इस बरसात के बीच भी आंदोलनकारी अनोखा विरोध जताते हुए सूली पर लटकने और शरीर में बेड़ियां पहनकर प्रशासन के खिलाफ अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।
🏚️ अंधकारमय जीवन जीने को मजबूर विस्थापित, गृहस्थी का सारा सामान बर्बाद
परियोजना के कारण विस्थापित हुईं रानी रैकवार ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा, "मुझे अभी तक शासन की ओर से किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा जेसीबी चलवाकर मेरा घर भी गिरा दिया गया। फिलहाल मैं किसी तरह खेत के एक छोटे से घर में जीवन बिता रही थी, लेकिन अब वहां भी डैम का पानी पहुंचने लगा है। इसके कारण घर में रखा खाने का अनाज और गृहस्थी का तमाम जरूरी सामान पूरी तरह खराब हो गया है। सब कुछ तबाह हो चुका है, अब समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें और कहां जाएं।"
✊ सम्मानजनक पुनर्वास और पूर्ण मुआवजे की मांग को लेकर 'जय किसान संगठन' का मोर्चा
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे 'जय किसान संगठन' के अध्यक्ष अमित भटनागर ने मीडिया को बताया कि, "सरकारी नियमों के मुताबिक, जब भी कोई नई बांध परियोजना लागू होती है, तो उससे पहले सभी प्रभावित विस्थापितों को पूर्ण मुआवजा वितरित कर दिया जाता है। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि विस्थापितों को मुआवजा तक नहीं मिला और उससे पहले ही जबरन उनके मकानों पर जेसीबी चलवाकर गिरा दिए गए। इससे घरों में बांध का पानी भर रहा है। जबकि इन ग्रामीणों का एकमात्र दोष यह है कि वे उसी गांव में निवास करते थे, जहां से यह परियोजना शुरू हुई है।" उन्होंने मांग की है कि भू-अर्जन कानून का पालन जमीनी स्तर पर कड़ाई से किया जाए और जिन लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें तुरंत पूर्ण मुआवजा व सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए।
👩💼 पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार ने पहुंचकर लिया जायजा, विशेष सुनवाई सेल के गठन का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार ने अजयगढ़ विकासखंड के ग्राम बहरनीकला एवं कुंवरपुर का दौरा किया। उन्होंने मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत विस्थापित हुए परिवारों को पुनर्वास पैकेज की राशि के वितरण कार्य की प्रगति और पूरी प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद विस्थापितों से एक-एक करके संवाद किया और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए विधिवत आवेदन भी प्राप्त किए। कलेक्टर ने इस अवसर पर स्पष्ट रूप से कहा कि "प्रत्येक पात्र विस्थापित परिवार को निश्चित रूप से नियमानुसार मुआवजा और अतिरिक्त मुआवजा राशि मिलेगी। इसके लिए तहसील कार्यालय स्तर पर एक विशेष सुनवाई सेल का भी गठन किया जाएगा।"
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