अमरकंटक और डिंडोरी के जंगलों में साल बोरर कीट का खतरनाक अटैक, 9500 से ज्यादा संक्रमित पेड़ों को काटने की मिली अनुमति

मध्य प्रदेश के अमरकंटक और डिंडोरी के जंगलों में साल बोरर कीट का भीषण प्रकोप देखा जा रहा है। अनुमति मिलने के बाद अब संक्रमित पेड़ों की कटाई की तैयारी शुरू हो गई है।

Sep 27, 2026 - 17:43
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अमरकंटक और डिंडोरी के जंगलों में साल बोरर कीट का खतरनाक अटैक, 9500 से ज्यादा संक्रमित पेड़ों को काटने की मिली अनुमति

शहडोल: डिंडोरी जिले के घने जंगलों में इन दिनों साल बोरर (Sal Borer) कीट का भारी अटैक देखने को मिल रहा है, जिसके चलते वहां के संक्रमित पेड़ों को काटने की आधिकारिक अनुमति भी मिल चुकी है। इसी प्रकार अमरकंटक के विशाल और सुंदर जंगलों में भी साल बोरर कीट ने बुरी तरह से हमला बोल दिया है। अब इन कीटों से प्रभावित पेड़ों को हटाने और काटने की अनुमति मिलने के बाद वन विभाग पूरी तैयारी में जुट गया है और इसके लिए एक विस्तृत कार्ययोजना (प्लान) भी तैयार कर ली गई है।

🌲 अमरकंटक रेंज के 18 कक्षों में फैला है संक्रमण, सर्वे में मिले 9535 प्रभावित पेड़

अनूपपुर के सब डिवीजन राजेंद्रग्राम के एसडीओ एवं ट्रेनी आईएफएस जसवंत सिंह मीणा बताते हैं कि "अनूपपुर के अमरकंटक रेंज के जंगलों में साल बोरर से प्रभावित पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद हैं। साल बोरर अमरकंटक के एक ही मुख्य रेंज में पाया गया है, जहां कुल 18 कंपार्टमेंट (कक्ष) हैं। इन सभी में कुल 5157 हेक्टेयर का क्षेत्रफल साल बोरर से बुरी तरह प्रभावित है। अमरकंटक क्षेत्र में व्यापक सर्वे के बाद कुल 9535 पेड़ साल बोरर से संक्रमित पाए गए हैं।"

⚙️ पेड़ काटने की मिल चुकी है परमिशन, अक्टूबर से शुरू होगी कटाई की प्रक्रिया

एसडीओ मीणा के अनुसार, साल बोरर कीट से प्रभावित इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के लिए रीजनल एम्पावर्ड कमेटी (REC) से वैध अनुमति प्राप्त हो चुकी है। विभाग अक्टूबर महीने से संक्रमित पेड़ों की कटाई का प्लान कर रहा है। पूरी योजना के तहत ही चरणबद्ध तरीके से संक्रमित पेड़ों की कटाई की जाएगी। ट्रेनी आईएफएस बताते हैं कि संक्रमित पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से काटने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। बीट गार्ड से लेकर प्रभावित रेंज के मैदानी कर्मचारियों तक को प्रशिक्षित किया गया है। इसके लिए एक महीने पहले अमरकंटक में एक विशेष वर्कशॉप आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न स्थानों से कई वन्यजीव व वानिकी विशेषज्ञ शामिल हुए थे। इसके बाद डिंडोरी में भी वर्कशॉप हुई, जहां कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। अब ये प्रशिक्षित कर्मचारी पेड़ों को काटने वाले स्थानीय मजदूरों को विशेष ट्रेनिंग देंगे, जिसके बाद ट्रेंड मजदूरों से ही कटाई कराई जाएगी।

⛰️ दुर्गम इलाके और पहाड़ी रास्तों के कारण अमरकंटक में पेड़ों की कटाई है चुनौतीपूर्ण

अमरकंटक में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों की कटाई का काम काफी मुश्किल भरा है, क्योंकि यहां का इलाका काफी दुर्गम है। कुछ क्षेत्रों में ऊंची पहाड़ियां हैं, जिसके कारण कटे हुए पेड़ों का परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) करना भी एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा मजदूरों की कमी की समस्या भी आ सकती है, हालांकि वन विभाग ने इसके लिए पहले ही पुख्ता व्यवस्था और पूरी योजना तैयार कर ली है। इस पूरे अभियान में पूरी तरह प्रशिक्षित मजदूरों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

⚠️ क्यों खतरनाक है साल बोरर कीट? जानिए इसका इतिहास

साल बोरर कीट के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह कीट लगभग 30 से 35 वर्षों के अंतराल पर एक बार फिर से वापसी करता है। अमरकंटक और उसके आसपास के बेल्ट में 1995-96 के दौरान इस कीट का भयंकर प्रकोप आया था, उस समय भी बड़ी संख्या में साल के पेड़ों की कटाई करनी पड़ी थी। इसके अलावा उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक 1923-24 में भी डिंडोरी और अमरकंटक क्षेत्र में इसका व्यापक असर देखा गया था। अब ठीक तीन दशक (लगभग 30 साल) बाद एक बार फिर साल बोरर कीट का हमला अमरकंटक और डिंडोरी वन क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। संक्रमित पेड़ों को काटना इसलिए भी अनिवार्य हो जाता है क्योंकि यह कीट एक पेड़ से दूसरे स्वस्थ पेड़ पर तेजी से संक्रमण फैलाता है।

🪲 क्या होता है साल बोरर और कैसे होती है इसकी पहचान?

साल बोरर मूल रूप से एक प्रकार का बीटल (कीट) होता है, जो पेड़ के तने के अंदर रहता है और लकड़ी को भीतर से खोखला कर देता है। इसके बाद वह पेड़ पूरी तरह नष्ट और किसी काम का नहीं बचता। उस पेड़ को पूरी तरह बर्बाद करने के बाद यह कीट अगले पेड़ में चला जाता है। इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका यह है कि पेड़ के सबसे निचले हिस्से में बुरादे जैसा पदार्थ दिखाई देने लगता है और पेड़ की पत्तियां समय से पहले पीली पड़ने लगती हैं। यदि बाहरी तौर पर पहचानना हो तो ये इसके प्रमुख लक्षण हैं।

🌳 अमरकंटक के जंगलों में कितना फैला है संक्रमण?

अमरकंटक का पूरा जंगल लगभग 8525 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां करीब 40 लाख साल के पेड़ मौजूद हैं। क्षेत्र के कुल 10 बीट में से 8 बीटों में साल बोरर का संक्रमण पाया गया है। इनमें प्रमुख रूप से अमरकंटक, सोनमुड़ा, कपिलधारा, उमरगोहान, भूड़ाकोना, दमगढ़, पौड़ी और ताली बीट शामिल हैं। वन विभाग इस पूरे संकट से निपटने के लिए बेहद मुस्तैदी से काम कर रहा है।

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