सीए का सपना टूटा तो एमपीपीएससी में लहराया परचम, किसान के बेटे राजीव कुशवाहा बने असिस्टेंट प्रोफेसर

सीए की तैयारी छोड़ने के बाद रायसेन के राजीव कुशवाहा ने हार नहीं मानी और एमपीपीएससी परीक्षा पास कर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित हुए हैं।

Sep 27, 2026 - 18:03
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सीए का सपना टूटा तो एमपीपीएससी में लहराया परचम, किसान के बेटे राजीव कुशवाहा बने असिस्टेंट प्रोफेसर

रायसेन: जिंदगी में कई बार हमारे कुछ सपने पूरे नहीं हो पाते, लेकिन वही अधूरे सपने हमें अक्सर उस मुसलसल मंजिल तक पहुंचा देते हैं, जहां पहुंचने का रास्ता हमने कभी सोचा भी नहीं होता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनने का सपना बीच में छूटने के बाद ग्राम ऊषापुर निवासी राजीव कुशवाहा ने कभी हार नहीं मानी, बल्कि अपनी कड़ी मेहनत के दम पर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अपना चयन सुनिश्चित किया है। राजीव ने अपनी इस बड़ी उपलब्धि से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे रायसेन जिले और ऊषापुर क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है।

🏫 जवाहर नवोदय विद्यालय से हुई शुरुआती पढ़ाई, मुश्किलों से लड़ने की मिली सीख

कड़ी मेहनत और संघर्ष के बारे में बात करते हुए राजीव बताते हैं कि उनके पिता निर्भय सिंह सिलवानी तहसील के ऊषापुर गांव के एक साधारण किसान हैं। राजीव ने अपनी कक्षा छठी से बारहवीं तक की स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, बाड़ी से पूरी की है। नवोदय विद्यालय के अनुशासित माहौल में पढ़ाई के दौरान उन्हें जीवन की हर मुश्किल परिस्थिति से डटकर लड़ने की गहरी सीख मिली। राजीव कहते हैं कि उसी दौरान उनके मन में यह बात पूरी तरह बैठ गई थी कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, कभी हार नहीं माननी चाहिए। बेटे की इस अपार सफलता पर गर्व महसूस करते हुए उनके पिता निर्भय सिंह ने कहा, "मैं अपने बेटे की इस कामयाबी से बेहद खुश हूं। उसे अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए हमने बचपन में ही बाहर भेज दिया था और उसने अपनी कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।"

📚 सीए की तैयारी में आई अड़चन, लेकिन पढ़ाई से नहीं तोड़ा नाता

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद राजीव ने भोपाल की प्रसिद्ध बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एमकॉम (फाइनेंस) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने सीए (CA) बनने की राह चुनी और तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने सीए सीपीटी और सीए-आईपीसीसी ग्रुप-1 की परीक्षा पास भी कर ली थी, लेकिन कई बार कठिन प्रयासों के बाद भी जब सीए का सफर पूरा नहीं हो सका, तो उन्हें बीच में ही सीए की तैयारी छोड़नी पड़ी। यह उनके जीवन का सबसे कठिन और संघर्षपूर्ण दौर था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी पढ़ाई से अपना नाता नहीं तोड़ा और न ही अपने हौसला को टूटने दिया।

🎯 लगातार पांच बार नेट परीक्षा की पास, फिर हासिल किया जेआरएफ

कॉमर्स विषय के प्रति अपनी गहरी रुचि को आगे बढ़ाते हुए राजीव ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का पक्का फैसला किया। उन्होंने यूजीसी नेट (UGC NET) की नए सिरे से तैयारी शुरू की और अपनी मेहनत के बल पर लगातार पांच बार नेट की परीक्षा क्वालीफाई की। इसके बाद जून 2026 में उन्होंने कॉमर्स विषय में प्रतिष्ठित नेट-जेआरएफ (NET-JRF) भी हासिल कर लिया। सीए की लंबी तैयारी के दौरान पढ़े गए तमाम विषय और अध्ययन सामग्री ने उनकी इस नई तैयारी में काफी बड़ी मदद की।

🏆 एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में मिली सफलता, सेल्फ स्टडी को बनाया हथियार

इससे पहले राजीव कुशवाहा ने एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा-2022 में भी हिस्सा लिया था और वे लिखित परीक्षा तथा इंटरव्यू के दौर तक पहुंचे थे, लेकिन तब अंतिम रूप से उनका चयन नहीं हो सका था। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कमियों को सुधारते हुए दोबारा पूरे जोश से तैयारी शुरू की। अपनी इस सफलता के लिए उन्होंने किसी कोचिंग के बजाय पूरी तरह से 'सेल्फ स्टडी' (स्वयं अध्ययन) को अपना मुख्य हथियार बनाया और आखिरकार अपनी कड़ी मेहनत के बल पर साल 2024 की चयन सूची में अपनी जगह बना ली।

👨‍👩‍👦 किसान का बेटा बना असिस्टेंट प्रोफेसर, माता-पिता और गुरुओं को दिया सफलता का श्रेय

चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना देखने वाले राजीव कुशवाहा ने जब शुरुआती असफलता के बाद अपना रास्ता बदला, तो उनकी निरंतर मेहनत रंग लाई। अंततः वे एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर कॉमर्स परीक्षा-2024 की फाइनल मेरिट लिस्ट में चयनित होकर रायसेन जिले और पूरे समाज को गौरवान्वित कर दिया है। अपनी इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय राजीव ने अपने माता-पिता के आशीर्वाद और अपने सभी आदरणीय गुरुजनों को दिया है।

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