पीपल के पत्तों पर उकेरी जैन वाणि और कला, जैन मुनि शुद्धात्म सागर की 'पर्णकला' लिम्का बुक में दर्ज

सागर के जैन मुनि शुद्धात्म सागर महाराज ने पीपल के पत्तों पर पर्णकला के जरिए अद्भुत चित्र उकेरे हैं। उनकी इस अनूठी कला को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।

Sep 27, 2026 - 19:59
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पीपल के पत्तों पर उकेरी जैन वाणि और कला, जैन मुनि शुद्धात्म सागर की 'पर्णकला' लिम्का बुक में दर्ज

सागर: बहुत कम उम्र में आध्यात्मिक मार्ग चुनते हुए मात्र 16 साल की अवस्था में ब्रह्मचर्य व्रत और 23 साल की अल्पायु में मुनि दीक्षा धारण करने वाले जैन मुनि शुद्धात्म सागर महाराज आज जैन दर्शन के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी अनूठी 'पर्णकला' (Leaf Art) सर्जक के रूप में देश और दुनिया भर में अपनी एक विशिष्ट और अद्भुत पहचान बनाई है। वर्ष 2022 में अपने विहार के दौरान जंगल में स्वाध्याय करते समय, पीपल के पेड़ से बंदर द्वारा गिराए गए कुछ पत्तों को इकट्ठा कर जैन मुनि ने उन पर जिनवाणी और धर्म के संदेशों को उकेरने का अनूठा कार्य शुरू किया था।

✂️ पन्ना में सर्जिकल ब्लेड से बनाई भगवान की पहली तस्वीर, ऐसे शुरू हुआ कला का सिलसिला

इस घटना के ठीक एक साल बाद पन्ना जिले में प्रवास के दौरान उन्होंने सर्जिकल ब्लेड के माध्यम से पत्तों पर पहली बार सिद्ध भगवान की एक सुंदर तस्वीर बनाई, और यहीं से इस अनोखे सिलसिले की असली शुरुआत हुई। आज के समय में जैन मुनि करीब 300 से अधिक पत्तों पर पर्णकला के जरिए तरह-तरह के धार्मिक और सामाजिक चित्र उकेर चुके हैं। सबसे खास बात यह है कि उनके इन अनूठे और रचनात्मक प्रयासों को 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' (Limca Book of Records) और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में गौरवशाली स्थान दिया गया है।

🌳 जंगल में बंदरों द्वारा फेंके गए पत्तों से आया विचार, प्राचीन आचार्यों की परंपरा को बढ़ाया आगे

मुनि श्री 108 शुद्धात्म सागर महाराज ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि, ''पर्णकला का यह विचार सबसे पहले 26 मई 2022 को आया था। जब हम लोग विहार के दौरान एक घने जंगल में रुके हुए थे और दोपहर के शांत समय में अपना स्वाध्याय कर रहे थे, तभी पेड़ पर बैठे एक बंदर ने छोटी-छोटी शाखाओं को तोड़कर नीचे फेंका, जिनमें कई पीपल के पत्ते भी शामिल थे। तभी मेरे मन में इन पत्तों पर कुछ रचनात्मक और सकारात्मक करने का विचार आया। मैंने सोचा कि प्राचीन काल में हमारे जैन आचार्य घने जंगलों में निवास करते थे, और उनके पास जो जिनवाणी का दिव्य ज्ञान होता था, वे उसे ताड़पत्रों या पत्तों पर ही लिपिबद्ध करते थे। इसी प्राचीन परंपरा को ध्यान में रखते हुए मैंने सोचा कि वर्तमान समय में भी जिनवाणी को पत्तों पर उकेरा जा सकता है। इसके बाद मैंने जैन ग्रंथों के तत्वार्थ सूत्र, भक्तांबर स्तोत्र, स्वरूप संबोधन और सिद्धि यंत्र जैसे पावन ग्रंथों को पत्तों पर उकेरना शुरू किया, और इस तरह से इस अद्भुत पर्णकला की शुरुआत हुई।''

🇮🇳 पत्ते पर उकेरा भारत का नक्शा और जीवन दर्शन के संदेश देती कलाकृतियां

जैन मुनि ने आगे बताया कि इस पर्णकला की विधिवत शुरुआत साल 2023 में हुई थी, जब उनका मुनि संघ विहार करते हुए पन्ना पहुंचा था। वहां जब उन्हें कुछ और बेहतरीन पत्ते मिले, तो उनके मन में यह विचार और तीव्र हो गया कि जब इन पत्तों पर धर्मशास्त्रों की रचना की जा सकती है, तो अन्य सुंदर चित्र भी आसानी से बनाए जा सकते हैं। उन्होंने एक पत्ते पर सर्जिकल ब्लेड की मदद से मात्र 20 मिनट के भीतर सिद्ध भगवान की एक आकर्षक तस्वीर तैयार कर दी। इसके बाद उन्होंने अपनी गुरु परंपरा के चित्र, जैन धर्म की आहारचर्या, नरक दर्शन, योग के सप्तचक्र, मनुष्य की जीवन यात्रा, पारिवारिक चित्र और समाज को गहरा संदेश देने वाली कलाकृतियां बनाईं। इनमें बुलबुले उड़ाती हुई एक बालिका का चित्र काफी चर्चा का विषय रहा, जिसका मुख्य संदेश यह था कि हमारा यह जीवन भी पानी के बुलबुले की तरह बेहद क्षणभंगुर है। इसके अलावा उन्होंने दीपावली के पर्व, नृत्य करती हुई एक लड़की और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए भारत के नक्शे के साथ-साथ देश की रक्षा करने वाले हमारे वीर सैनिकों के चित्र भी इन पत्तों पर उकेरे हैं।

🏛️ देश के कई बड़े शहरों में लग चुकी है पर्णकला की भव्य चित्र प्रदर्शनी

जब जैन मुनि ने पर्णकला के माध्यम से केवल जैन दर्शन ही नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और संपूर्ण जीवन दर्शन से जुड़े विभिन्न चित्र बनाए, तो समाज के लोग इससे बहुत अधिक प्रभावित हुए। मुनि शुद्धात्म सागर महाराज ने बताया कि, ''मैंने अपनी पहली पर्ण कला प्रदर्शनी साल 2023 में पन्ना जिले में ही लगाई थी, जिसमें आचार्य कुंदकुंद स्वामी की जीवन यात्रा पर आधारित 10 से 12 चित्र प्रदर्शित किए गए थे। उनकी संपूर्ण जीवन यात्रा का सजीव वर्णन मैंने पर्णकला के माध्यम से किया था। इसके बाद साल 2024 में देहरादून, फिर उत्तर प्रदेश के खतौली और पिछले साल इंदौर शहर में भी इस प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया था। वर्तमान वर्ष में सागर के मुख्य कटरा बाजार स्थित ऐतिहासिक गौराबाई जैन मंदिर में इस भव्य प्रदर्शनी को लगाया गया है। पिछले तीन वर्षों के लंबे अंतराल में जैन मुनि पीपल के पत्तों पर लगभग 300 से ज्यादा जीवंत चित्र उकेर चुके हैं।''

📜 लिम्का और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम, लोग कर रहे हैं खूब सराहना

वैसे तो आज कला जगत में पर्णकला (Leaf Art) के कई अन्य कलाकार भी मौजूद हैं जो पत्तों पर तरह-तरह की चित्रकारी करते हैं, लेकिन जैन मुनि शुद्धात्म सागर महाराज लीफ आर्ट के ऐसे इकलौते और अनूठे कलाकार हैं जिन्होंने पीपल के पत्तों पर विशेष रूप से जिनशासन और जैन संस्कृति को उकेरा है। इस तरह का सूक्ष्म और धार्मिक कार्य अभी तक किसी अन्य व्यक्ति द्वारा नहीं किया गया है, यही वजह है कि जैन मुनि की इस असाधारण कला साधना को 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है। इस प्रदर्शनी के संयोजक सुनील जैन पड़वार बताते हैं कि मुनि श्री ने अपने चातुर्मास और विहार के कठिन दिनों में भी पीपल के पत्तों पर पर्णकला के जरिए जिनशासन और गृहस्थ जीवन के मूल्यों से जुड़े जो चित्र बनाए हैं, उन्हें देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और इसे बेहद पसंद कर रहे हैं। वहीं, गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर के मंत्री राकेश जैन का कहना है कि मुनि श्री विभव सागर महाराज ससंघ का सागर में पावन आगमन हुआ है, और उनके सुयोग्य शिष्य शुद्धात्म सागर महाराज द्वारा बनाए गए ये चित्र हमें हमारे जीवन दर्शन और जैन धर्म के बारे में अद्भुत व प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करते हैं।

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