हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद इंदौर में धड़ल्ले से लगे हैं अवैध होर्डिंग्स और बैनर, हादसों को दे रहे न्योता

इंदौर में हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद भी अवैध होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर्स पर लगाम नहीं लग पा रही है। प्रमुख चौराहों पर लगे अवैध ढांचे हादसों को न्योता दे रहे हैं।

Sep 28, 2026 - 10:26
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हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद इंदौर में धड़ल्ले से लगे हैं अवैध होर्डिंग्स और बैनर, हादसों को दे रहे न्योता

इंदौर: माननीय उच्च न्यायालय (High Court) के तमाम कड़े आदेशों और निर्देशों के बावजूद शहर के भीतर अवैध होर्डिंग्स और विज्ञापनों की आंधी थमने का नाम बिल्कुल नहीं ले रही है। मौजूदा हालात यह हैं कि शहर के कई सबसे व्यस्त और प्रमुख चौराहों पर अवैध होर्डिंग्स सीना ताने खड़े नजर आ रहे हैं। ये अवैध स्ट्रक्चर न केवल सुचारू यातायात में भारी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं, बल्कि शहरवासियों के लिए बड़े सड़क हादसों का खुला न्योता भी साबित हो रहे हैं। हाई कोर्ट पहले भी कई बार शहर में लगे इन अवैध, अनधिकृत और खतरनाक होर्डिंग्स, पोस्टर्स व बैनरों को लेकर अपनी गहरी नाराजगी और असंतोष जता चुका है।

📢 अराजकता की हद: अवैध पोस्टरों का विरोध करने पर कार्यकर्ता की पिटाई, रीगल तिराहे पर करनी पड़ी थी भूख हड़ताल

शहर में किस हद तक प्रशासनिक अराजकता फैली हुई है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिनों पहले एक स्थानीय विधायक के समर्थकों ने एक सामाजिक कार्यकर्ता को सिर्फ इसलिए बुरी तरह पीट दिया था, क्योंकि उन्होंने चौराहे पर नियमों के विरुद्ध लगाए गए राजनीतिक पोस्टर्स, बैनरों और फ्लैक्स का विरोध करते हुए एक वीडियो रील बनाई थी। उस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करवाने के लिए पीड़ित सामाजिक कार्यकर्ता को मजबूरन नौ दिनों तक रीगल तिराहे पर बैठकर लंबी भूख हड़ताल करनी पड़ी थी। इसके बाद जब प्रशासन हरकत में आया, तो नगर निगम ने कुछ चुनिंदा जगहों पर कार्रवाई कर बैनर तो हटा दिए, लेकिन उनके भारी-भरकम लोहे और बांस के ढांचे आज भी जस के तस खड़े हुए हैं।

🛑 मरीमाता और महू नाका चौराहे का हाल: यातायात सिग्नल तक बांस की बल्लियों से ढंके

रविवार को जब पड़ताल की गई तो शहर के कई इलाकों की असल तस्वीर सामने आई। मरीमाता चौराहा हो या महू नाका चौराहा, हर तरफ स्थिति अब भी पूरी तरह नहीं सुधरी है। मरीमाता चौराहे पर पुलिस पेट्रोल पंप से लेकर आगे तक अवैध होर्डिंग्स लगे हुए थे। विरोध के बाद निगम ने कागजी कार्रवाई करते हुए पोस्टर तो हटा दिए, लेकिन उन्हें रोकने वाले पाइप, बांस और लोहे के ढांचे आज भी वहीं खड़े हैं। इस चौराहे पर लगे मुख्य यातायात सिग्नलों की स्थिति भी ऐसी है कि उन्हें पूरी तरह से बांस की बल्लियों और पाइपों से ढांक दिया गया है, जिससे सिग्नलों की दृश्यता प्रभावित होती है। इसके अलावा मालवा मिल चौराहे पर भी बड़े-बड़े फ्लैक्स और होर्डिंग्स अनधिकृत रूप से टंगे हुए हैं।

🎉 त्योहार बीत जाने के बाद भी पेड़ और सड़कों पर लटके हैं राजनीतिक और धार्मिक पोस्टर

जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे बड़े पर्व बीते काफी दिन हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कबीटखेड़ी, जय अंबे नगर मेन रोड और सुखलिया जैसे क्षेत्रों में सड़क के किनारे व पेड़ों पर गणेश विसर्जन और अन्य आयोजनों के पोस्टर अब भी ज्यों के त्यों लगे हुए हैं। विभिन्न मित्र मंडलों के ये अवैध बैनर जनता को मुंह चिढ़ाते नजर आते हैं। अपने राजनीतिक रुतबे का प्रदर्शन करने के लिए इन पोस्टरों और बैनरों पर आयोजकों द्वारा कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला और प्रभारी महापौर राजेंद्र राठौर तक की तस्वीरें प्रमुखता से छापी गई हैं। विजय नगर मेन रोड पर कृष्णा दूध डेयरी के पास स्थित मंदिर की प्राचीन दीवार पर भी कृष्ण जन्माष्टमी का पुराना पोस्टर चिपका हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस क्षेत्र में नगर निगम के कई बड़े अधिकारी खुद निवास करते हैं और वे दिन-रात यहीं से गुजरते हैं, इसके बावजूद इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है।

⚡ पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे, पाटनीपुरा में घायल हो चुका है एक युवक

शहर में इन अवैध और असुरक्षित होर्डिंग्स की वजह से पहले भी कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। कुछ समय पहले पाटनीपुरा चौराहे पर अचानक एक अवैध होर्डिंग गिरने के कारण सड़क से गुजर रहा एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस तरह की दर्दनाक घटनाओं के बावजूद न तो अवैध होर्डिंग्स लगाने वाले लापरवाह लोगों पर कोई प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही ऐसे आयोजनों को प्रायोजित करने वालों पर कोई शिकंजा कसा गया है।

📜 अवैध विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ आउटडोर मीडिया रूल्स 2017 के तहत कार्रवाई के हैं निर्देश

हाई कोर्ट में एक विज्ञापन एजेंसी द्वारा एक महत्वपूर्ण याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसमें यह कहा गया था कि वे नगर निगम को निर्धारित शुल्क और भारी-भरकम राजस्व का भुगतान करके विधिवत अनुमति प्राप्त यूनिपोल, लालीपाप और अन्य वैध आउटडोर विज्ञापन स्ट्रक्चर संचालित करते हैं, लेकिन विभिन्न अवसरों पर इन वैध स्ट्रक्चरों पर बिना किसी अनुमति के राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर जबरन टांग दिए जाते हैं, जिससे उनके स्ट्रक्चरों को भी भारी नुकसान पहुंचता है। इस याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने यह स्पष्ट आदेश दिए थे कि अवैध विज्ञापन और होर्डिंग्स लगाने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध 'आउटडोर मीडिया रूल्स 2017' के कड़े प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

📏 क्या हैं अवैध पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स की कानूनी परिभाषा?
  • बिजली के खंभों, पेड़ों या सड़क के डिवाइडरों पर बिना किसी आधिकारिक अनुमति के टांगे गए फ्लैक्स।

  • ऐसे पोस्टर और कटआउट स्ट्रक्चर, जो किसी रजिस्टर्ड चार्टर्ड या स्ट्रक्चरल इंजीनियर के आधिकारिक सुरक्षा प्रमाण-पत्र के बिना खड़े किए गए हों।

  • ऐतिहासिक धरोहरों, राजभवन, उच्च न्यायालय और धार्मिक स्थलों के आसपास के प्रतिबंधित दायरे में लगाए गए विज्ञापन स्ट्रक्चर।

  • ट्रैफिक सिग्नल, मुख्य चौराहों या संवेदनशील मोड़ों के ठीक पास लगी अत्यधिक तेज रोशनी वाली या झिलमिलाती हुई डिजिटल स्क्रीन।

  • ट्रैफिक लाइट, सड़क सुरक्षा संकेत बोर्ड या दिशा-सूचक (Direction) बोर्डों को पूरी तरह छिपाने वाले विज्ञापन स्ट्रक्चर।

  • पैदल यात्रियों का रास्ता रोककर फुटपाथ, सर्विस रोड या रोड डिवाइडर पर अनाधिकृत रूप से खड़े किए गए यूनिपोल और बोर्ड।

  • निर्धारित मानक आकार से बड़े फ्रेम या हवा के दबाव व वजन के सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले स्ट्रक्चर।

  • किसी भी प्रकार की पूर्व अनुमति और तय प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लगाए गए सभी विज्ञापन स्ट्रक्चर अवैध की श्रेणी में आते हैं।

🗣️ निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से सीधी बात: क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी?
  • सवाल: शहर में कई जगहों पर अवैध होर्डिंग्स, पोस्टर और बैनर लगे हुए हैं, लेकिन इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

  • जवाब: हमारी रिमूवल टीम लगातार क्षेत्रों में जाकर कार्रवाई करती रहती है।

  • सवाल: हाई कोर्ट ने विशेष रूप से अवैध होर्डिंग्स लगाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, उस पर क्या कदम उठेंगे?

  • जवाब: हमारी टीमें लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई कर रही हैं। कई बार हमें स्थानीय स्तर पर पुलिस का पूरा सहयोग नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से कार्रवाई बीच में बाधित हो जाती है।

  • सवाल: भविष्य में आपकी तरफ से इस अवैध गतिविधि पर रोक लगाने के लिए क्या सख्त कदम उठाए जाएंगे?

  • जवाब: हमने अपनी रिमूवल टीम को इस मामले में पूरी तरह सख्त कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दे दिए हैं। इस अवैध गतिविधि पर अब हमारी विशेष और कड़ी निगरानी बनी रहेगी।

⚖️ हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियां और निर्देश (मार्च और जुलाई 2026)
  • मार्च 2026: माननीय उच्च न्यायालय ने एक सुनवाई के दौरान निर्देश देते हुए इंदौर नगर निगम कमिश्नर से यह पता लगाने के लिए कहा था कि नियमों के विरुद्ध जाकर सड़क के मुख्य डिवाइडरों और फुटपाथों पर आखिरकार कौन-से अवैध होर्डिंग्स लगाए गए हैं। कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी में यह कहा था कि प्रशासनिक लापरवाही, अनदेखी और सुस्ती के कारण नियमों के वैधानिक प्रावधानों को कभी भी अर्थहीन नहीं बनाया जा सकता है।

  • जुलाई 2026: जुलाई 2026 में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर में लगातार बढ़ रहे अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर-होर्डिंग्स के मामलों पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शहर से हर, हाल में 24 घंटे के भीतर तमाम अवैध होर्डिंग्स तुरंत हटाए जाएं।

📍 प्रमुख मार्गों पर अब भी जस के तस खड़े हैं अवैध होर्डिंग और बैनर

शहर के कई अति व्यस्त मार्गों जैसे कि महू नाका चौराहा, अन्नपूर्णा रोड और जवाहर मार्ग पर आज भी धड़ल्ले से अवैध होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर सरेआम नजर आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम इन लापरवाह आयोजकों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करने से बच रहा है। दशहरा मैदान के ठीक सामने और प्रसिद्ध रणजीत हनुमान मंदिर के पास वर्तमान में आगामी गरबा महोत्सव के कई अवैध पोस्टर लगे हुए हैं। महू नाका चौराहे पर तो स्थिति यह है कि यातायात पुलिस और पुलिस के बड़े आला अधिकारियों के दफ्तरों के ठीक पास स्थित दुकानों के ऊपर भी अवैध होर्डिंग्स धड़ल्ले से टंगे हुए हैं। इन दुकानों पर सुबह से लेकर देर रात तक ग्राहकों का भारी आना-जाना लगा रहता है, और यदि यह भारी होर्डिंग अचानक गिर पड़े तो किसी भी ग्राहक को गंभीर चोट या जान का नुकसान हो सकता है। इसी तरह जवाहर मार्ग पर बंबई बाजार और मोहनपुरा से लेकर तारकेश्वर महादेव मंदिर तक दुकानों के दोनों तरफ ऐसे अवैध बैनर-पोस्टरों का जाल फैला हुआ है, जहां से प्रतिदिन सुबह से रात तक हजारों तेज रफ्तार वाहनों का आवागमन होता है। इन अनधिकृत होर्डिंग्स के गिरने से कोई भी वाहन चालक किसी बड़े और गंभीर हादसे का शिकार बन सकता है, जिससे किसी की भी जान जा सकती है।

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