कर्मचारियों की सेहत पर खर्च करना खैरात नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए बड़ा निवेश; रिपोर्ट में खुलासा

प्लम्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक कर्मचारियों की सेहत पर निवेश करने से कंपनियों का खर्च बच रहा है और हर कर्मचारी पर 480 रुपये की बचत हो रही है।

Sep 28, 2026 - 17:03
0
कर्मचारियों की सेहत पर खर्च करना खैरात नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए बड़ा निवेश; रिपोर्ट में खुलासा

आज के समय में कॉरपोरेट कल्चर बहुत तेजी से बदल रहा है। एक वक्त ऐसा भी था जब कंपनियां अपने कर्मचारियों को केवल नाममात्र का बेसिक हेल्थ इंश्योरेंस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती थीं, लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। आज के इस आधुनिक दौर में ऑफिस की तरफ से कर्मचारियों को मेंटल हेल्थ सपोर्ट, टेलिहेल्थ कंसल्टेशन से लेकर जिम की मेंबरशिप जैसी प्रीमियम सुविधाएं दी जा रही हैं। बाहर से देखने पर भले ही यह लग सकता है कि कंपनियां अपने स्टाफ को खुश करने के लिए पैसे लुटा रही हैं, लेकिन इसके पीछे एक सोची-समझी और मजबूत वित्तीय प्लानिंग काम कर रही है। एम्प्लॉई हेल्थ बेनिफिट प्लेटफॉर्म ‘प्लम’ की एक नई रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले और दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं, जो यह साबित करते हैं कि कर्मचारियों की सेहत पर पैसा खर्च करना कोई खैरात नहीं, बल्कि एक ऐसा शानदार निवेश है जो कंपनियों का लंबा खर्च बचा रहा है।

💰 हर कर्मचारी पर हो रही 480 रुपये की बचत: गंभीर बीमारियों के क्लेम में आई 13 फीसदी की बड़ी गिरावट

प्लम्स की ‘स्टैंडर्ड ऑफ एम्प्लॉई बेनिफिट्स 2026’ रिपोर्ट में पिछले चार सालों के दौरान करीब 10 लाख लोगों की 15,000 से अधिक पॉलिसियों के डेटा का गहराई से विश्लेषण किया गया है। इसमें यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि कॉर्पोरेट हेल्थ का पुराना तरीका अब पुराना पड़ चुका है और अब कंपनियां कर्मचारी के बीमार पड़ने का इंतजार नहीं करतीं। जो कंपनियां टेलिहेल्थ, रूटीन चेकअप या शुरुआती स्वास्थ्य जांच जैसी प्रिवेंटिव सुविधाओं पर निवेश कर रही हैं, वहां पुरानी और गंभीर बीमारियों के क्लेम में 13 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इसका सीधा और सकारात्मक असर कंपनियों की वित्तीय सेहत पर पड़ा है और उन्हें हर कर्मचारी पर प्रीमियम के रूप में औसतन लगभग 480 रुपये की सीधी बचत हो रही है। यदि किसी कंपनी में 1,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, तो यह बचत सीधे तौर पर 4,80,000 रुपये (लगभग 5 लाख रुपये) तक पहुंच जाती है। रिपोर्ट के अनुसार यह कोई एक बार का फायदा नहीं है, बल्कि आने वाले तीन सालों में इसके सालाना 6 फीसदी की दर से और अधिक बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

📈 बेहतर हेल्थकेयर सुविधाएं देने की मची होड़: सम-इंस्योर्ड और मैटरनिटी लिमिट में जबरदस्त इजाफा

महज चार साल पहले तक ऐसे बेनिफिट प्लान बहुत कम देखने को मिलते थे जिनमें पारंपरिक इंश्योरेंस के साथ-साथ हेल्थकेयर का पूरा सपोर्ट भी शामिल हो। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह पलट चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि अच्छी और आधुनिक हेल्थकेयर सुविधाएं प्रदान करने वाले नियोक्ताओं (Employers) का आंकड़ा मात्र 5 प्रतिशत से बढ़कर अब सीधे 23 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वर्तमान में लगभग हर चौथी कंपनी अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों को एक मजबूत वित्तीय व स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र प्रदान कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, 5 लाख रुपये से अधिक का सम-इंस्योर्ड (Sum-insured) देने वाली कंपनियों की संख्या में 53 प्रतिशत का भारी उछाल आया है, जबकि मैटरनिटी लिमिट को 75,000 रुपये से ज्यादा बढ़ाने वाली कंपनियों का ग्राफ 155 फीसदी बढ़ गया है। इसके अलावा, टर्म लाइफ बीमा को अपने प्लान में जोड़ने वाली कंपनियों की तादाद में भी 179 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्लम के को-फाउंडर और सीईओ अभिषेक पोद्दार का इस पर कहना है कि भारत में पहले एम्प्लॉई बेनिफिट का मतलब सिर्फ साधारण बीमा तक ही सीमित हुआ करता था, लेकिन अब बेहतरीन कंपनियां किसी भी प्रकार का क्लेम आने से पहले ही हेल्थकेयर पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जो कॉरपोरेट सोच में एक सकारात्मक बदलाव है।

🧑‍⚕️ पहली बार मिला प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का लाभ: न्यूट्रिशन और दिल की सेहत में हुआ बड़ा सुधार

कंपनियों के इस दूरदर्शी कदम से देश के वर्कफोर्स के एक बहुत बड़े हिस्से को पहली बार प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का सीधा फायदा मिला है। डेटा से यह बात सामने आती है कि लगभग 61 फीसदी कर्मचारियों ने कंपनी द्वारा दिए गए हेल्थ चेकअप बेनिफिट का पूरा इस्तेमाल किया, जबकि 74 फीसदी ने मेंटल हेल्थ सपोर्ट का लाभ उठाया। इसके अलावा, 31 फीसदी लोगों ने अपनी जिंदगी में पहली बार जिम मेंबरशिप का आनंद लिया, जो केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि उनकी कंपनी ने उन्हें यह सुविधा मुहैया कराई थी। जिन कर्मचारियों ने दोबारा अपना हेल्थ चेकअप कराया, उनमें से 70 प्रतिशत लोगों के खान-पान (न्यूट्रिशन) और हृदय की सेहत (Heart Health) में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार देखने को मिला। कर्मचारियों के परिवारजनों ने भी इन सुविधाओं का भरपूर लाभ उठाया है, जिसमें डॉक्टर कंसल्टेशन में 37 प्रतिशत और ओपीडी क्लेम में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले परिवार के सदस्यों की रही है।

📊 भविष्य में बढ़ सकता है हेल्थकेयर खर्च, लेकिन वर्कफोर्स में किया गया निवेश कभी नहीं जाता बेकार

आज आधुनिक टेक्नोलॉजी के कारण इन तमाम स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचना बेहद आसान हो गया है। प्लम के सीटीओ सौरभ अरोड़ा के अनुसार, कंपनियों के सामने अब अगली बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि लोग अपने पास उपलब्ध बेनिफिट्स का पूरी तरह से इस्तेमाल करें। जैसे-जैसे इन सुविधाओं को लेने का अनुभव और बेहतर होगा, एम्प्लॉई हेल्थकेयर में ‘जेवन्स पैराडॉक्स’ की स्थिति देखने को मिल सकती है, जिसका मतलब है कि जब कर्मचारी इन सुविधाओं का अधिक इस्तेमाल करने लगेंगे, तो शुरुआती दौर में कंपनियों का कुल हेल्थकेयर खर्च कुछ बढ़ सकता है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि भारत में अभी भी 40 प्रतिशत से भी कम लोगों तक हेल्थ इंश्योरेंस की वास्तविक पहुंच है। इसके बावजूद, भारत में ग्रुप हेल्थ कवरेज हर साल 23 फीसदी की तेज रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है। अंततः यह रिपोर्ट इस महत्वपूर्ण तथ्य पर जोर देती है कि वर्कफोर्स के स्वास्थ्य पर किया गया यह निवेश कंपनियों के लिए कभी भी घाटे का सौदा नहीं होता, क्योंकि जब कर्मचारी स्वस्थ और तंदुरुस्त रहते हैं, तो उनकी कार्यक्षमता (Productivity) बढ़ती है, वे लंबे समय तक कंपनी से जुड़े रहते हैं और इससे अंततः कंपनी का ही दीर्घकालिक वित्तीय लाभ होता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User